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नई दिल्ली: Duleep Trophy के क्वार्टर फाइनल मुकाबले में ईस्ट जोन ने नॉर्थ ईस्ट जोन को पारी और 210 रन के बड़े अंतर से हराकर सेमीफाइनल में जगह बना ली। मैच में युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी का बल्ला तो नहीं चला, लेकिन उन्होंने गेंद से अपनी टीम के लिए दो अहम विकेट लेकर महत्वपूर्ण योगदान दिया।

ईस्ट जोन ने अपनी एकमात्र पारी में 467 रन का विशाल स्कोर खड़ा किया। इसके बाद टीम के गेंदबाजों ने नॉर्थ ईस्ट जोन के बल्लेबाजों पर दबाव बनाए रखा और मुकाबले को पूरी तरह अपने नियंत्रण में रखा।

बल्ले से नहीं चला वैभव का बल्ला

मुकाबले में सबसे ज्यादा नजरें युवा बल्लेबाजी सनसनी वैभव सूर्यवंशी पर थीं। ईस्ट जोन की पारी में उनसे बड़ी पारी की उम्मीद थी, लेकिन बाएं हाथ के बल्लेबाज सिर्फ 8 रन बनाकर आउट हो गए। हालांकि, बल्ले से योगदान नहीं दे पाने के बाद वैभव को कप्तान इशान किशन ने गेंदबाजी में आजमाया। नॉर्थ ईस्ट जोन के खिलाफ विकेट नहीं गिरने पर इशान ने वैभव से बाएं हाथ की स्पिन गेंदबाजी कराने का फैसला किया।

इशान किशन ने दिया गेंदबाजी का मौका

नॉर्थ ईस्ट जोन की दूसरी पारी में जब विकेट गिर नहीं रहे थे, तब इशान किशन ने वैभव सूर्यवंशी को गेंद थमाई। वैभव ने इस मौके को पूरी तरह भुनाया और अपनी छोटी गेंदबाजी स्पेल में दो महत्वपूर्ण विकेट हासिल कर लिए। वैभव ने 3 ओवर में बिना कोई रन दिए 11 रन देकर 2 विकेट लिए। उन्होंने किशन लिंगदोह को 25 रन और इम्लीवाटी लेमतुर को 4 रन के स्कोर पर पवेलियन भेजा।

"इशान भैया को नहीं पता था कि मैं विकेट लेने वाला गेंदबाज हूं"

अपनी गेंदबाजी के बारे में बात करते हुए वैभव सूर्यवंशी ने कहा कि इशान किशन को शायद उनकी विकेट लेने की क्षमता का अंदाजा नहीं था। उन्होंने BCCI की ओर से शेयर किए गए वीडियो में कहा, 'अगर आप किसी बल्लेबाज से पूछेंगे तो उसे गेंदबाजी करना भी पसंद होता है। इसी तरह गेंदबाजों को बल्लेबाजी करना पसंद होता है। दोनों को दूसरे काम करने में काफी मजा आता है।'

वैभव ने बताया कि जब नॉर्थ ईस्ट जोन के विकेट नहीं गिर रहे थे, तब उन्हें गेंदबाजी करने के लिए कहा गया। उन्होंने कहा, 'विपक्षी टीम का विकेट नहीं गिर रहा था और मुझे 2-3 ओवर गेंदबाजी करने के लिए कहा गया। इशान भैया को लगा कि मुझे गेंदबाजी देना थोड़ा जोखिम भरा हो सकता है, लेकिन उन्हें नहीं पता था कि मैं विकेट लेने वाला गेंदबाज हूं।'

"बल्लेबाज के लिए विकेट लेने से बड़ी खुशी नहीं"

वैभव ने बताया कि एक बल्लेबाज के लिए गेंद से विकेट हासिल करना बेहद खास अनुभव होता है। उन्होंने कहा कि बल्लेबाजी में असफल रहने के बाद गेंदबाजी से टीम के लिए योगदान देना उन्हें काफी अच्छा लगा। उन्होंने कहा, 'बल्लेबाज के लिए विकेट लेने से बड़ी खुशी नहीं हो सकती। मेरे लिए भी यह काफी अच्छा अनुभव था।'

युवा खिलाड़ी ने आगे बताया कि उन्हें पता था कि गेंदबाजी का मौका बहुत कम मिलेगा, इसलिए वह मिले हुए समय का पूरा फायदा उठाना चाहते थे। उन्होंने कहा, 'मेरे दिमाग में सिर्फ यही था कि अगर मैं यहां पांच विकेट भी ले लूं तो मुझे गेंदबाजी के लिए सिर्फ तीन ओवर ही मिलेंगे। इसलिए मैंने अपनी तरफ से सर्वश्रेष्ठ गेंदबाजी करने की कोशिश की। मैंने एक ही जगह पर गेंद डालने की कोशिश की और अपना स्पेल खत्म किया।'

"बल्लेबाजी में अच्छा नहीं हुआ, इसलिए गेंदबाजी से योगदान अच्छा लगा"

वैभव ने माना कि बल्लेबाजी में उनका प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा, लेकिन गेंद से टीम के लिए योगदान देकर उन्हें काफी खुशी मिली। उन्होंने कहा, 'मुझे काफी अच्छा लगा। बल्लेबाजी में मेरे लिए चीजें अच्छी नहीं रहीं, इसलिए गेंदबाजी से टीम के लिए योगदान देना वास्तव में काफी अच्छा लगा।' उन्होंने आगे कहा, 'जब कोई बल्लेबाज विकेट लेता है तो उससे बड़ी खुशी की बात नहीं होती। मैंने गेंदबाजी का काफी आनंद लिया।'

ईस्ट जोन अब सेमीफाइनल में सेंट्रल जोन से भिड़ेगा

नॉर्थ ईस्ट जोन के खिलाफ बड़ी जीत के बाद ईस्ट जोन अब Duleep Trophy के सेमीफाइनल में पहुंच गया है। सेमीफाइनल में उसका सामना मौजूदा चैंपियन सेंट्रल जोन से होगा। ईस्ट जोन और सेंट्रल जोन के बीच पहला सेमीफाइनल रविवार से बेंगलुरु में शुरू होगा। अब वैभव सूर्यवंशी की नजर इस मुकाबले में बल्ले से बड़ी पारी खेलने के साथ-साथ टीम के लिए हर संभव तरीके से योगदान देने पर होगी।

क्वार्टर फाइनल में बल्ले से सिर्फ 8 रन बनाने के बावजूद गेंद से दो विकेट हासिल करना वैभव के लिए एक यादगार प्रदर्शन रहा। युवा खिलाड़ी ने यह भी दिखाया कि जरूरत पड़ने पर वह अपनी टीम के लिए गेंद से भी उपयोगी साबित हो सकते हैं।