स्पोर्ट्स डेस्क : वडोदरा में न्यूजीलैंड के खिलाफ पहले वनडे में भारत की जीत सिर्फ स्कोरकार्ड तक सीमित नहीं रही, बल्कि इस मुकाबले ने टीम मैनेजमेंट की सोच और बदलती वनडे रणनीति पर भी रोशनी डाली। खास तौर पर केएल राहुल को नंबर 6 पर भेजने का फैसला चर्चा का केंद्र बन गया। जहां एक वर्ग इसे टॉप-ऑर्डर बल्लेबाज की बर्बादी मान रहा था, वहीं पूर्व भारतीय ऑलराउंडर इरफान पठान ने इसे आधुनिक वनडे क्रिकेट के हिसाब से एक दूरदर्शी और बेहद जरूरी कदम बताया है।
हाई-प्रेशर चेज ने खोली रणनीति की परतें
मैच में पहले बल्लेबाजी करते हुए न्यूजीलैंड ने 300 के करीब रन बनाकर भारत के सामने एक चुनौतीपूर्ण लक्ष्य रखा। जैसे-जैसे मैच आगे बढ़ा, पिच पर हल्की पकड़ और गेंद की गति में कमी साफ दिखने लगी। शुरुआती ओवरों में बल्लेबाजी आसान थी, लेकिन मिडिल ओवर्स के बाद स्ट्रोक खेलना जोखिम भरा हो गया। भारत की पारी में विराट कोहली ने एक बार फिर जिम्मेदारी संभाली और 93 रनों की संयमित लेकिन प्रभावी पारी खेली। शुभमन गिल ने दूसरे छोर से स्थिरता दी, जिससे भारत लक्ष्य के करीब बना रहा। हालांकि, विकेट गिरने के बाद रन रेट ने दबाव बढ़ा दिया और मैच का फैसला निचले मिडिल ऑर्डर पर आ टिका।
जब जिम्मेदारी आई नंबर 6 पर
जैसे ही मैच निर्णायक मोड़ पर पहुंचा, केएल राहुल नंबर 6 पर बल्लेबाजी करने उतरे। यह वह समय था जब बड़े शॉट्स से ज्यादा जरूरी था हालात को पढ़ना और स्कोरबोर्ड को चलते रहना। राहुल ने शुरुआत से ही जोखिम लेने के बजाय सिंगल-डबल पर फोकस किया। उन्होंने ढीली गेंदों पर रन बटोरे, स्ट्राइक रोटेट की और यह सुनिश्चित किया कि जरूरी रन रेट कभी भी हाथ से बाहर न जाए। उनकी शांत और संतुलित बल्लेबाजी ने भारत को ओवर रहते लक्ष्य तक पहुंचाया और टीम ने सीरीज में 1-0 की बढ़त बना ली। यह पारी भले ही सुर्खियों में न आई हो, लेकिन मैच जिताने के लिहाज से बेहद अहम थी।
इरफान पठान ने बताया बदलते वनडे का सच
इस फैसले पर उठ रही बहस के बीच इरफान पठान ने अपने यूट्यूब चैनल पर इसका तकनीकी विश्लेषण किया। उन्होंने कहा कि वनडे क्रिकेट अब पहले जैसा नहीं रहा, जहां आखिरी ओवर सिर्फ पावर-हिटिंग के लिए होते थे। पठान के मुताबिक 34-35 ओवर के बाद गेंद या तो रिवर्स स्विंग करने लगती है या फिर धीमी हो जाती है। ऐसे में आखिरी फेज में ऐसे बल्लेबाज की जरूरत होती है जो तकनीकी रूप से मजबूत हो, फील्ड को समझे और हल्की मूवमेंट से घबराए नहीं।
क्यों राहुल जैसे बल्लेबाज की जरूरत थी
इरफान पठान ने साफ कहा कि उस समय दूसरे बल्लेबाज जहां असहज दिख रहे थे, वहीं केएल राहुल पूरी तरह नियंत्रण में नजर आए। उनकी सबसे बड़ी ताकत सिंगल लेकर दबाव को तोड़ना है। पठान के अनुसार, मुश्किल चेज़ में घबराहट और मैच को शांत दिमाग से खत्म करने के बीच फर्क वही बल्लेबाज पैदा करता है जो स्थिति को समझकर खेलता है। राहुल ने यही किया और यही वजह है कि उन्हें नंबर 6 पर खिलाना एक लॉजिकल और स्मार्ट फैसला था।