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नई दिल्लीः मैच फिक्सिंग के कारण मैच ना खेल पाने से तेज गेंदबाज एस श्रीसंत हर किसी को अपना दुखड़ा सुना रहे हैं। हाल ही में उन्होंने 'बिग बाॅस' के शो में कहा कि उनको जो सजा दी गई वो बेहद कड़ी है। 7 दिसंबर को फिक्सिंग मामले में श्रीसंत ने सुप्रीम कोर्ट के आगे रहम करने की अपील की। श्रीसंत ने कहा कि जब 2000 के मैच फिक्सिंग प्रकरण में शामिल होने की वजह से आजीवन प्रतिबंध का सामना कर रहे क्रिकेटर से राजनीतिक बने मोहम्मद अजहरुद्दीन के मामले में इसे बदला जा सकता है तो फिर उसके ऊपर लगा प्रतिबंध क्यों नहीं खत्म किया जा सकता।
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आजीवन प्रतिबंध बहुत ही कठोर है

श्रीसंत ने कहा कि आजीवन प्रतिबंध बहुत ही कठोर है। उसका कहना है, ''उसके पास इंग्लिश काउन्टी में मैच खेलने के प्रस्ताव हैं। अब तक मैं चार साल से प्रतिबंध का सामना कर रहा हूं। हालांकि 2013 के सनसनीखेज स्पॉट फिक्सिंग मामले में 2015 में दिल्ली की एक अदालत बरी कर चुकी है।'' 
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जल्द होगी सुनवाई

आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट ने आठ नवंबर, 2012 को अपने फैसले में अजहरुद्दीन पर लगे आजीवन प्रतिबंध को गैरकानूनी करार देते हुए कहा था कि कानून की विवेचना में यह कहीं नहीं टिक सकेगा। न्यायमूर्ति अशोक भूषण और न्यायमूर्ति अजय रस्तोगी की पीठ ने इस तथ्य पर गौर किया कि निचली अदालत के 2015 के फैसले के खिलाफ दिल्ली हाई कोर्ट में लंबित अपील जनवरी के दूसरे सप्ताह में सुनवाई के लिए सूचीबद्ध है। 
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श्रीसंत की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सलमान खुर्शीद ने कहा कि यह खिलाड़ी अब 35 साल का हो गया है और यदि यह प्रतिबंध खत्म नहीं किया गया तो वह ब्रिटेन में क्लब क्रिकेट भी नहीं खेल सकेगा।  उन्होंने कहा कि 35 साल की आयु में खिलाड़ी के अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट की संभावना लगभग खत्म हो जाती है और कम से कम उसे क्लब क्रिकेट खेलने की अनुमति दी जानी चाहिए । वहीं बीसीसीआई की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता पराग त्रिपाठी ने कहा कि श्रीसंत के खिलाफ बहुत ठोस साक्ष्य थे, जिसकी वजह से क्रिकेट की शीर्ष संस्थ ने उस पर प्रतिबंध लगाया है। इसे हटाया नहीं जा सकता। 

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