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स्पोर्ट्स डेस्क : सफलता आसान नहीं होती और इसके लिए त्याग के साथ कड़ी मेहनत करनी पड़ती है। लेकिन अगर लक्ष्य हो तो सब कुछ हासिल किया जा सकता है और इसका उदाहरण 17 साल के युवा चैम्पियन डोमाराजू गुकेश ने दिया है। भारतीय शतरंज स्टार गुकेश ने टोरंटो में कैंडिडेट्स शतरंज टूर्नामेंट जीतकर इतिहास रच दिया और विश्व चैम्पियनशिप खिताब के सबसे युवा चैलेंजर बन गए। उन्होंने 40 साल पुराना गैरी कास्पोरोव का रिकॉर्ड तोड़ा। वह साल के आखिर में मौजूदा विश्व चैम्पियन चीन के डिंग लिरेन को चुनौती देंगे। 

माता-पिता का त्याग 

गुकेश को इस मुकाम तक पहुंचाने के लिए उनके माता-पिता को भी काफी त्याग करने पड़े। गुकेश के पिता डॉक्टर हैं और आंख, नाक और गला रोग विशेषज्ञ हैं। बेटे के शतरंज में बेहतर करने पर उन्हें नौकरी छोड़नी पड़ी क्योंकि विदेश में टूर्नामेंट होने के कारण वे मरीजों को समय नहीं दे पाते थे। लेकिन बेटे की सफलता के लिए उन्होंने अपना क्लीनिक बंद कर दिया। 

इससे उनके परिवार की आय सीमित हो गई और टूर्नामेंट और परिवार के खर्च का जिम्मा मां पद्मा पर आ गया जोकि माइक्रोबायोलाजिस्ट हैं। ऐसे में गुकेश को स्पांसर भी नहीं मिल रहे थे जबकि विदेश में टूर्नामेंट खेलने का खर्च बहुत अधिक था। उन्हें कई बार लोन तक लेने पड़े। 

उनके पिता रजनीकांत विदेशी टूर्नामेंट का एक किस्सा सुनाते हैं। 2021 में जब वे गुकेश को यूरोप लेकर गए तब उन्हें भारत वापस आने में लगभग 4 महीने लग गए। दरअसल गुकेश ने इस दौरान 13 से 14 टूर्नामेंट खेले। उन्हें तीन बार फ्लाइट छोड़नी पड़ी। 

7 साल की उम्र में खेलना शुरू किया शतरंज

गुकेश का जन्म 29 मई 2006 को चेन्नई में हुआ था। उनके पिता डॉक्टर होने के साथ ही क्रिकेटर भी रह चुके हैं और उन्होंने राज्य स्तरीय सिलेक्शन के लिए ट्रॉयल भी दिए, लेकिन परिवारिक दबाव में क्रिकेट छोड़कर डॉक्टरी की पढ़ाई करने लगे। गुकेश सात साल की उम्र में शतरंज में रुचि दिखाने लगे थे और इसे देखते हुए उनके पिता ने भी खूब प्रेरित किया। इसी के साथ ही खेल और पढ़ाई के बीच सामंजस्य बनाने के लिए चौथी कक्षा के बाद नियमित पढ़ाई से भी छूट दे दी। रजनीकांत के मुताबिक गुकेश प्रोफेशनल शतरंज खेलने के बाद से वार्षिक परीक्षा नहीं दे रहा है। 

12 की उम्र में दुनिया का दूसरे सबसे युवा ग्रैंडमास्टर बना गुकेश 

7 साल की उम्र से शतरंज खेलने वाले गुकेश 12 साल की उम्र में दुनिया का दूसरे सबसे युवा ग्रैंडमास्टर बन गया। 2015 में अंडर-9 एशियन स्कूल चेस चैम्पियनशिप, 2018 में अंडर-12 कैटेगरी में वर्ल्ड यूथ चैम्पियनशिप, 2017 में 34वें कैप्पेल-ला-ग्रांडे-ओपन में इंटरनेशनल मास्टर और 15 जनवरी 2019 को 12 साल 7 महीने और 17 दिन की उम्र में दुनिया के दूसरे सबसे युवा ग्रैंड मास्टर बन गए। हालांकि उनका यह रिकॉर्ड अमेरिकी ग्रैंड मास्टर अभिमन्यु मिश्रा ने तोड़ दिया जो 12 साल 4 महीने में ग्रैंड मास्टर बने। गुकेश अब दुनिया के तीसरे सबसे युवा ग्रैंड मास्टर हैं। दूसरे नंबर पर रूस के सर्गेई कारजाकिन हैं जो 12 साल 7 महीने में ग्रैंड मास्टर बने थे। हालांकि गुकेश कैंडिडेट्स चैम्पियनशिप जीतने वाले अब दुनिया के सबसे युवा खिलाड़ी बने हैं।