स्पोर्ट्स डेस्क : भारतीय विकेटकीपर-बल्लेबाज जितेश शर्मा ने अपने क्रिकेट करियर को लेकर बड़ा खुलासा किया है। उन्होंने बताया कि पेशेवर क्रिकेटर बनना कभी उनके जीवन की प्राथमिक योजना नहीं थी। उनका सपना भारतीय सेना में शामिल होने का था, लेकिन स्कूल ट्रायल में लिया गया एक आकस्मिक फैसला उन्हें अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट की राह पर ले आया। दक्षिण अफ्रीका के पूर्व कप्तान एबी डिविलियर्स के पॉडकास्ट में बातचीत के दौरान जितेश ने अपने संघर्ष, प्रेरणा और मानसिकता पर खुलकर बात की।
डिफेंस में जाने का सपना, क्रिकेट बना संयोग
Jitesh Sharma ने बताया कि बचपन में उनका झुकाव सेना और एयर फोर्स की ओर था। वे डिफेंस सर्विसेज में करियर बनाना चाहते थे। लेकिन राज्य सरकार की एक नीति, जिसमें खेलों में राज्य का प्रतिनिधित्व करने पर छात्रों को अतिरिक्त अंक मिलते थे, ने उन्हें स्कूल क्रिकेट ट्रायल्स में जाने के लिए प्रेरित किया। ट्रायल के दौरान विकेटकीपर के कॉलम में केवल एक नाम देखकर उन्होंने ग्लव्स पहन लिए। यही वह क्षण था जिसने उनकी जिंदगी की दिशा बदल दी। उन्होंने कहा कि पहली बार ग्लव्स पहनना उनके लिए स्वाभाविक अनुभव था और वहीं से क्रिकेट का सफर शुरू हुआ।
मेंटर्स ने गढ़ी पहचान
जितेश ने अपने विकास में दो अहम लोगों का विशेष योगदान बताया। लोकल कोच प्रीतम गांधी ने शुरुआती दिनों में उनकी तकनीक और सोच को नई दिशा दी। उन्होंने उन्हें पारंपरिक रेड-बॉल माहौल से बाहर निकलकर आधुनिक खेल की जरूरतों के मुताबिक ढलने की सलाह दी। बाद में भारतीय सीनियर विकेटकीपर Dinesh Karthik से मुलाकात उनके करियर का अहम मोड़ साबित हुई। जितेश के मुताबिक, इन दोनों मार्गदर्शकों ने उनके आत्मविश्वास और कौशल को निखारने में बड़ी भूमिका निभाई।
ताकत भी, कमजोरी भी
जितेश ने अपनी सबसे बड़ी ताकत सीखने की भूख को बताया। उनका कहना है कि वे हमेशा नई चीजें सीखने को तैयार रहते हैं और जिद्दी रवैया नहीं अपनाते। हालांकि, उन्होंने स्वीकार किया कि यही गुण कई बार कमजोरी बन जाता है। उन्होंने कहा कि कभी-कभी वे खुद को जरूरत से ज्यादा धकेल देते हैं, जबकि कुछ स्थितियों में रुककर सुधार पर ध्यान देना भी जरूरी होता है। उनके अनुसार, संतुलन बनाना ही असली चुनौती है।
RCB में मिला भरोसा, बदली दिशा
IPL में RCB के साथ जुड़ने के बाद जितेश के करियर को नई रफ्तार मिली। उनका मानना है कि फ्रेंचाइजी मैनेजमेंट के भरोसे ने उनके अंदर की लड़ने वाली मानसिकता को मजबूत किया। उन्होंने कहा कि RCB से पहले उनके पास कौशल तो था, लेकिन किसी ने खुलकर विश्वास नहीं जताया। जब टीम मैनेजमेंट ने कहा कि वे उनके साथ खड़े हैं, तो इससे उनका आत्मविश्वास कई गुना बढ़ गया। यही भरोसा उन्हें दबाव भरे मैचों में बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रेरित करता है।
दबाव में खेलने का मंत्र
जितेश ने हाई-प्रेशर मुकाबलों में सफल होने की अपनी रणनीति भी साझा की। उन्होंने बताया कि वे हर मैच में कुछ खास करने की कल्पना करते हैं, लेकिन साथ ही वर्तमान में रहने और सांसों पर ध्यान केंद्रित करने की कोशिश करते हैं। उनका मानना है कि स्कोरबोर्ड की स्थिति को समझना, गेंदबाज की योजना पढ़ना और अपनी ताकत के मुताबिक शॉट चुनना दबाव को कम करता है। जब खिलाड़ी अपनी क्षमताओं पर भरोसा रखता है, तो दबाव अपने आप कम हो जाता है।