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नई दिल्ली: प्रतिभाशाली भारतीय पहलवान बजरंग पूनिया ने कोराना वायरस के संक्रमण से निपटने में मदद करने के लिए सोमवार को छह महीने के अपने वेतन को दान करने के साथ तोक्यो ओलंपिक खेलों को टालने की मांग की। पच्चीस साल के इस भारतीय पहलवान ने कहा कि कई देश ओलंपिक से नाम वापस ले चुके है और ऐसे में अगर इसका आयोजन होता है तो टूर्नामेंट का महत्व कम होगा। बजरंग इन खेलों में भारत के पदक दावेदारों में से एक है। कोरोनो वायरस के बढ़ते मामलों के कारण हालांकि इसका आयोजन संदेह के घेरे में है। 

दरअसल, बजरंग के छह महीने के वेतन दान करने की पहल का खेल मंत्री किरेन रीजीजू ने भी समर्थन किया। बजरंग ने ट्वीट किया, ‘मैंने अपना छह महीने का वेतन दान करने का फैसला किया है।' बजरंग ने कहा, ‘ओलंपिक से पहले हमें कोरोना वायरस से लड़ना होगा। यदि स्थिति में सुधार नहीं होता है और यह 2-3 महीने तक जारी रहता है तो ओलंपिक को स्थगित करना पूरी तरह से सही रहेगा।' उन्होंने कहा, ‘अगर कोरोना वायरस का कहर जारी रहता है तो बहुत सारे देश अपने खिलाड़ियों को नहीं भेजेंगे। पहले से ही कनाडा और आस्ट्रेलिया ने कहा है कि वे अपने खिलाड़ियों को नहीं भेजेंगे। ऐसे आयोजन का क्या फायदा।' 

पुनिया ने आगे कहा, ‘यह सिर्फ भारत की समस्या नहीं है, यह एक वैश्विक मुद्दा है, जिससे पहले निपटने की जरूरत है।' बजरंग सोनीपत के एक अपार्टमेंट में प्रशिक्षण ले रहे हैं, जबकि उनके कोच शाको बेंटिनिडिस जॉर्जिया के लिए रवाना हो गए हैं। महिला पहलवान के लिए विदेशी कोच एंड्रयू कुक भी कुछ दिन पहले अमेरिका के लिए रवाना हो गए हैं। भारतीय ओलंपिक संघ (आईओए)ने कहा कि वह इन खेलों में देश की भागीदारी के बारे में चार सप्ताह में तय करेगा। अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति (आईओसी) पर खेलों को स्थगित करने का भारी दबाव है। इस बीच इन खेलों में पदक की एक अन्य दावेदार विनेश फोगाट ने कहा कि वह कड़ा अभ्यास कर रही हैं और उन्हें खेलों के स्थगित होने या नहीं होने की कोई चिंता नहीं। उन्होंने कहा, ‘‘मैं अपने घर पर हूं और अब तक का प्रशिक्षण अच्छा रहा है। मेरे कुछ भी कहने से कुछ नहीं होगा।''

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