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स्पोर्ट्स डेस्क: भारत में होने वाले आईसीसी मेंस टी20 वर्ल्ड कप 2026 से पहले स्कॉटलैंड की तैयारियों को बड़ा झटका लग सकता है। टीम के प्रमुख तेज गेंदबाज सफयान शरीफ का भारतीय वीज़ा अब तक क्लीयर नहीं हो पाया है। पाकिस्तानी मूल के होने के कारण उनका मामला अतिरिक्त जांच के दायरे में है, जिससे टूर्नामेंट से ठीक पहले स्कॉटलैंड की मुश्किलें बढ़ गई हैं।

देर से मिली क्वालिफिकेशन, तुरंत खड़ी हुई चुनौती

बांग्लादेश की जगह आखिरी समय में टूर्नामेंट में शामिल हुई स्कॉटलैंड टीम को अब कूटनीतिक और लॉजिस्टिक चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। टूर्नामेंट की शुरुआत 7 फरवरी से होनी है और ऐसे में समय तेजी से निकल रहा है। हाल के वर्षों में पाकिस्तानी मूल के खिलाड़ियों को भारत यात्रा के लिए वीज़ा प्रक्रिया में देरी का सामना करना पड़ा है, जिससे यह चिंता और गहराती जा रही है।

क्यों अहम है सफयान शरीफ का वीज़ा

सफयान शरीफ सिर्फ टीम का हिस्सा नहीं, बल्कि स्कॉटलैंड के गेंदबाज़ी आक्रमण की रीढ़ माने जाते हैं। स्कॉटलैंड के लिए 90 वनडे और 75 टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच, कुल 198 अंतरराष्ट्रीय विकेट, नई गेंद और डेथ ओवर्स के विशेषज्ञ गेंदबाज; ऐसे अनुभवी खिलाड़ी की अनुपस्थिति स्कॉटलैंड के लिए न केवल रणनीतिक बल्कि मानसिक झटका भी साबित हो सकती है।

पृष्ठभूमि और वीज़ा की जटिलता

इंग्लैंड के हडर्सफील्ड में जन्मे सफयान शरीफ के पिता पाकिस्तानी और मां ब्रिटिश-पाकिस्तानी मूल की हैं। सात साल की उम्र में वे स्कॉटलैंड आ गए थे और पिछले एक दशक से देश का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। उनकी नागरिकता और क्रिकेटिंग पात्रता पूरी तरह स्पष्ट है, लेकिन मौजूदा मामला खेल नहीं, बल्कि क्षेत्रीय वीज़ा संवेदनशीलताओं से जुड़ा है।

स्कॉटलैंड, ICC और BCCI के बीच तेज़ बातचीत

क्रिकेट स्कॉटलैंड ने साफ किया है कि वीज़ा क्लीयरेंस उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। बोर्ड की सीईओ ट्रूडी लिंडब्लैड के अनुसार, स्कॉटलैंड बोर्ड लगातार आईसीसी के संपर्क में है, जो आगे बीसीसीआई और स्थानीय प्रशासन के साथ समन्वय कर रहा है।

समस्या समय की है। स्कॉटलैंड को बांग्लादेश के रिप्लेसमेंट के तौर पर कुछ ही दिन पहले पुष्टि मिली, जिससे दस्तावेज़ी प्रक्रिया और यात्रा योजनाओं के लिए बेहद कम समय बचा है।

वैश्विक टूर्नामेंटों में पहले भी सामने आ चुकी है समस्या

यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले अमेरिका और इंग्लैंड जैसी टीमों के पाकिस्तानी मूल के खिलाड़ियों को भी भारत में खेले गए टूर्नामेंटों से पहले वीज़ा देरी का सामना करना पड़ा है। हालांकि ज़्यादातर मामलों में वीज़ा मिल गया, लेकिन अनिश्चितता ने टीम की तैयारियों पर असर डाला।