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नई दिल्ली : भारत की दिग्गज बैडमिंटन खिलाड़ी साइना नेहवाल ने पीवी सिंधु के आक्रामक खेल में आए बदलाव की सराहना करते हुए कहा कि जापान ओपन का खिताब इस बात का प्रमाण है कि उनके पास अब भी कई बड़े खिताब जीतने की क्षमता बाकी है। साइना ने कहा कि किसी भी चैंपियन को कभी भी कमतर नहीं आंका जा सकता है। 

दो बार की ओलंपिक पदक विजेता 31 वर्षीय सिंधु तोक्यो में रविवार को खेले गए महिला एकल फाइनल में जापान की तीन बार की विश्व चैंपियन अकाने यामागुची को सीधे गेमों में हराकर अपने करियर का पहला सुपर 750 खिताब जीता। यह 2019 विश्व चैंपियनशिप के बाद उनका सबसे बड़ा खिताब है। इससे पहले उन्होंने 2022 सिंगापुर ओपन सुपर 500 और 2024 सैयद मोदी इंटरनेशनल सुपर 300 का खिताब अपने नाम किया था। 

साइना ने कहा, 'पिछले दो-तीन साल सिंधु के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण रहे। वह लगातार चोटों से उबरने की कोशिश कर रही थीं। उन्होंने जिस तरह की वापसी की है, वह काबिल-ए-तारीफ है। जापान ओपन में उन्होंने तीन-चार शीर्ष खिलाड़ियों को हराकर खिताब जीता और पूरे टूर्नामेंट में बेहद आक्रामक खेल दिखाया। उनके आक्रमण में काफी सुधार आया है। उम्र बढ़ने और चोटों के साथ शीर्ष स्तर पर लगातार खेलना आसान नहीं होता। ऐसे में मानसिक दबाव और तनाव स्वाभाविक है।' 

साइना ने कहा, 'मुझे विश्वास है कि इस जीत से सिंधु का आत्मविश्वास लौट आया है। किसी भी चैंपियन को कभी कमतर नहीं आंका जाना चाहिए। वह हमेशा वापसी करती है और अच्छा प्रदर्शन करती है। इतने वर्षों तक उन्होंने विश्व स्तर पर अपनी पहचान बनाए रखी है।' लंदन ओलंपिक 2012 की कांस्य पदक विजेता साइना ने उम्मीद जताई कि नई पीढ़ी के खिलाड़ी भी लगातार अच्छा प्रदर्शन करेंगे। 

उन्होंने 'नीवा बुपा' के कार्यक्रम के इतर कहा, 'कई युवा खिलाड़ी अच्छा खेल रहे हैं, लेकिन उन्हें लगातार बड़े टूर्नामेंट जीतने होंगे। बैडमिंटन में निरंतरता सबसे अहम है। यही वजह है कि यह देश का दूसरा सबसे लोकप्रिय खेल बन चुका है। जूनियर खिलाड़ियों को हर अगले टूर्नामेंट में बेहतर प्रदर्शन का लक्ष्य रखना चाहिए।' भारत 17 से 23 अगस्त तक 17 वर्षों बाद बैडमिंटन विश्व चैंपियनशिप की मेजबानी करेगा। साइना ने कहा कि घरेलू परिस्थितियों का फायदा उठाकर भारतीय खिलाड़ी पदक जीत सकते हैं। 

उन्होंने कहा, 'मुझे बेहद खुशी है कि इतने वर्षों बाद भारत विश्व चैंपियनशिप की मेजबानी कर रहा है। सिंधु शानदार लय में हैं और जापान ओपन जीतकर आई हैं। वहीं लक्ष्य सेन भी बेहतरीन खेल रहे हैं। हमारे पास ऐसे खिलाड़ी हैं जो घरेलू दर्शकों के सामने खिताब जीतने का माद्दा रखते हैं।' साइना ने 23 जुलाई से ग्लासगो में शुरू होने वाले राष्ट्रमंडल खेलों के लिए भारतीय दल को शुभकामनाएं देते हुए बैडमिंटन, हॉकी और निशानेबाजी जैसे लोकप्रिय खेलों को इस बार प्रतियोगिता से बाहर रखने पर निराशा जताई। कोचिंग में आने के सवाल पर साइना ने कहा कि अभी वह इस बारे में जल्दबाजी में कोई निर्णय नहीं लेंगी।

उन्होंने कहा, 'मैं कुछ समय और इंतजार करूंगी। अभी गोपी सर (पुलेला गोपीचंद) भी नई पीढ़ी के खिलाड़ियों के साथ काम करने की चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। कोचिंग केवल तकनीक सिखाने का काम नहीं है। मैंने लंबे समय तक खेला है और काफी दबाव झेला है। कोच बनने पर खिलाड़ियों का दबाव भी संभालना पड़ता है। खेलना अपेक्षाकृत आसान है, लेकिन कोचिंग कहीं अधिक कठिन जिम्मेदारी है।' प्रतिस्पर्धी बैडमिंटन में वापसी की संभावना पर साइना ने साफ कहा कि अब ऐसा कर पाना बेहद कठिन है। उन्होंने कहा, 'एक बार गठिया (आर्थराइटिस) हो जाए तो वापसी करना बहुत मुश्किल हो जाता है। अगले साल स्कोरिंग प्रणाली में बदलाव जरूर होगा, लेकिन मेरी वापसी संभव नहीं दिखती।'