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नई दिल्ली : भारतीय कुश्ती महासंघ (डब्ल्यूएफआई) ने पुरुष फ्रीस्टाइल कोच हुसैन करीमी को छह महीने में ही बर्खास्त करते हुए दावा किया कि यह कोच अपने साथ वीआईपी संस्कृति लेकर आया जिसका देश में पालन नहीं किया जा सकता। ईरान के कोच ने हालांकि इस आरोप को खारिज किया है। करीमी का अनुबंध तोक्यो ओलंपिक तक था। ईरान के इस कोच को उनकी बर्खास्तगी का नोटिस बुधवार को सौंपा गया। डब्ल्यूएफआई के सहायक सचिव विनोद तोमर ने कहा, ‘वह वीआईपी संस्कृति का पालन कर रहे थे और उनकी मांगों को मानना बेहद मुश्किल हो गया था। हमने भारतीय खेल प्राधिकरण (साइ) को इसकी जानकारी दे दी है। हम अब नया कोच ढूंढ रहे हैं।' 

करीमी के साथ काम करते हुए डब्ल्यूएफआई को किन परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था इस बारे में पूछने पर तोमर ने कहा कि वह कभी कोचों या पहलवानों के साथ रिश्ते नहीं बना पाए। तोमर ने कहा, ‘‘उनकी हमेशा कोई ना कोई शिकायत या मांग होती थी। उन्होंने साइ परिसर में रहने से इनकार कर दिया जहां राष्ट्रीय शिविर चल रहा था इसलिए हमें साइ केंद्र के समीप उनके लिए फ्लैट किराए पर लेना पड़ा। वह जब भी भारत में यात्रा करते थे तो हमें उन्हें कार मुहैया करानी पड़ती थी।' उन्होंने कहा, ‘वह हमेशा टूर्नामेंटों के दौरान अकेले रहने पर जोर देते थे जबकि अन्य कमरे साझा करते थे। नूर-सुल्तान में विश्व चैंपियनशिप के दौरान भी यूडब्ल्यूडब्ल्यू के निर्देशों के अनुसार दो लोगों को कमरा साझा करना था लेकिन वह अकेले रहे। उनकी सभी मांगों को स्वीकार करना मुश्किल था।' 

करीमी को 3500 डालर के मासिक वेतन पर नियुक्त किया गया था लेकिन डब्ल्यूएफआई ने कहा कि उनकी अतिरिक्त मांगों के कारण खर्चे 5000 डालर पहुंच गए थे। डब्ल्यूएफआई के लिए चिंता की एक अन्य बड़ी बात यह था कि करीमी का अपने शिष्यों तक के साथ कोई लगाव नहीं था। तोमर ने कहा, ‘टूर्नामेंट के दौरान वह मैट पर जाते थे लेकिन पहलवानों का पसीना साफ करने से इनकार कर दिया जो मुकाबले के दौरान प्रत्येक कोच करता है। यहां तक कि शिविर में ट्रेनिंग के दौरान इसी कारण से वह उदाहरण के साथ तकनीक नहीं समझाते थे क्योंकि उन्हें पसीने से तर-बतर पहलवानों को छूने में समस्या थी।' 

दूसरी तरफ करीमी ने कहा कि भारत में खेल की प्रगति के लिए अच्छी व्यवस्था नहीं है। करीमी ने कहा, ‘उन्होंने मेरा अनुबंध रद्द कर दिया। भारत में व्यवस्था सही नहीं है। यहां काफी समस्या है।' उन्होंने कहा, ‘सभी आरोप गलत हैं। यह (भारतीय) कोचों की मेरे लिए पूर्व निर्धारित योजना है। महासंघ ने मेरे से बात किए बगैर मेरा अनुबंध रद्द कर दिया, यह गैर पेशेवर तरीका है।' करीमी ने इन आरोपों को भी बकवास बताया कि उन्होंने ‘वीआईपी' की तरह बर्ताव किया। उन्होंने कहा, ‘वे ऐसा कैसे कह सकते हैं? उन्होंने मुझे कम से कम सुविधाओं वाला घर दिया और मैंने इस पर आपत्ति नहीं जताई। मेरे अनुबंध के अलावा मेरी कोई इच्छा नहीं थी।' 

भारत ने नूर सुल्तान में हाल में संपन्न विश्व चैंपियनशिप में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया जहां भारत के पुरुष फ्रीस्टाइल पहलवानों ने चार पदक जीत और तीन ओलंपिक कोटा जीते। पता चला है कि करीमी सोनीपत जिले के बाहलगढ़ में राष्ट्रीय शिविर में अपना कार्यक्रम चलाना चाहते थे लेकिन देश के एलीट पहलवानों ने अपने हिसाब से ट्रेनिंग की। बजरंग पूनिया जार्जिया के शाको बेनटिनिदिस के साथ ट्रेनिंग कर रहे हैं जबकि सुशील कुमार रूस के कमाल मालिकोव के साथ ट्रेनिंग करते हैं। नूर सुल्तान में क्रमश: रजत और कांस्य पदक जीतने वाले दीपक पूनिया और रवि दाहिया दिल्ली के छत्रसाल स्टेडियम में गुर सीखते हैं। डब्ल्यूएफआई ने विश्व चैंपियनशिप के दौरान उज्बेकिस्तान और रूस के कुछ कोचों से बात की और कुछ इच्छुक उम्मीदवारों को आवेदन करने को कहा। राष्ट्रीय शिविर एक नवंबर से शुरू होगा और डब्ल्यूएफआई के इससे पहले किसी को नियुक्त करने की उम्मीद है। 

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