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नई दिल्ली : ओलंपिक पदक विजेता मुक्केबाज लवलीना बोरगोहेन बर्मिंघम राष्ट्रमंडल खेलों से पहले आईबीए विश्व चैम्पियनशिप के प्री-क्वार्टर फाइनल से बाहर होने को एक बहुत जरूरी ‘सीख' मानती है। तोक्यो ओलंपिक की कांस्य पदक विजेता लवलीना का विश्व चैम्पियनशिप में अभियान 70 किग्रा वर्ग के प्री-क्वार्टर फाइनल में निराशाजनक हार के बाद समाप्त हुआ था।

पिछले साल तोक्यो में पोडियम पर अपना अभियान खत्म करने के बाद अपनी पहली अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में लवलीना को ‘फेयर चांस टीम' (देश छोड़ने के लिए मजबूर होने वाले खिलाड़ी) की सिंडी नगाम्बा ने 4-1 से हराया था। लवलीना ने विश्व चैंपियनशिप में देश के तीन पदक विजेता निकहत जरीन (स्वर्ण, 52 किग्रा), मनीषा मौन (कांस्य, 57 किग्रा) और परवीन हुड्डा (कांस्य, 63 किग्रा) के सम्मान समारोह के कार्यक्रम के इतर कहा कि मेरी तैयारी (विश्व चैंपियनशिप के लिए) इतनी अच्छी नहीं थी। 

ओलंपिक के बाद बहुत सी चीजें बदल गई हैं। मुझे कई चीजों को समय देना था, प्रतिबद्धताओं को पूरा करना था। उन्होंने कहा कि लेकिन जैसा कि एक कहावत है कि आप अपनी जीत से नहीं सीखते, आप अपनी हार से सीखते हैं और इस हार ने मुझे बहुत महत्वपूर्ण सबक सिखाया है। भविष्य के लक्ष्यों के बारे में पूछे जाने पर असम की इस मुक्केबाज ने कहा कि मेरा मुख्य लक्ष्य अब भी ओलंपिक स्वर्ण है, लेकिन मुझे इसके लिए कदम दर कदम  चलना होगा। ऐसे में मेरा अगला कदम राष्ट्रमंडल खेल है और मैं वहां चैंपियन बनना चाहती हूं।  

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