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जालन्धर : आईपीएल में अपनी दमदार परफार्मेंस के कारण रातों रात स्टार बने हार्दिक पांड्या 25 साल के हो गए हैं। टी-20 और वनडे क्रिकेट में लंबे-लंबे छक्के मारने के लिए मशहूर हार्दिक को 2019 के वल्र्ड कप के लिए भारतीय टीम का प्रमुख हिस्सा माना जा रहा है। हार्दिक को इस जगह तक पहुंचने के लिए कई संघर्षों का सामना करना पड़ा है। उनका बचपन आर्थिक तंगी से होकर गुजरा था। इस बाबत हार्दिक ने ही एक इंटरव्यू में खुलासा करते हुए कहा कि ज्यादातर परिवारों की तरह हमारे परिवार ने भी बुरे दिन देखे। हमने भी नाश्ते और डिनर में सिर्फ मैगी खाकर गुजारा किया। और तो और भले ही हम क्रिकेट अकादमी से ट्रेनिंग नहीं लेते थे लेकिन हमारे पास ऐसे बल्ले नहीं होते थे जिससे परफेक्ट शॉट लगा सकते हो। ऐसे में मैंने अपने साथी क्रिकेटरों से बैट उधार लेकर प्र्रैक्टिस करनी शुरू की। मुझे खुद पर भरोसा था जिसका फल मुझे इंडिया टीम में आकर मिला।

पिता थे क्रिकेट के फैंस, आर्थिक तंगी के बावजूद ट्रेनिंग दिलवाई
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हार्दिक के पिता हिमांशु पांड्या एक समय गुजरात के सूरत में फाइनांस का काम करते थे। लेकिन 1998 में आई मंदी के कारण उन्हें काम छोड़कर वडोदरा शिफ्ट होना पड़ा। हिमांशु क्रिकेट के बड़े फैन थे। ऐसे में उन्होंने अपने दोनों बेटों क्रुणाल और हार्दिक को क्रिकेट खेलने के लिए प्रेरित किया। घर की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी। बावजूद इसके हिमांशु ने अपने दोनों बेटों को वडोदरा की किरण मोरे अकादमी से ट्रेनिंग दिलवाई। 

जब केन्या के क्रिकेटरों ने सिर्फ हार्दिक को ऑटोग्राफ दिया

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हार्दिक का रंग बचपन से ही हलका काला रहा था। इस कारण गली के बच्चे भी उसे काला कहकर बुलाते थे। हार्दिक के भाई क्रुणाल ने एक प्रोग्राम दौरान इस किस्से से जुड़ा एक वाक्या भी सुनाया था। कु्रणाल अनुसार 2003 के क्रिकेट वल्र्ड कप टीम की तैयारी के लिए केन्या की टीम बड़ौदा प्रैक्टिस के लिए आई थी। सभी खिलाड़ी वापस होटल जाने के लिए बस की प्रतीक्षा में खड़े थे। तभी क्रिकेट अकादमी के कुछ बच्चे केन्या के क्रिकेटरों का ऑटोग्राफ लेने आ गए। लेकिन केन्या के खिलाड़ी ऑटोग्राफ देने के मूड में नहीं थे। तभी केन्या के एक क्रिकेटर ने हार्दिक को देख लिया। उन्हें हार्दिक को बुलाकर ऑटोग्राफ दे दिया। शायद हार्दिक का रंग देखकर उन्हें लगा हो कि यह बच्चा उनके ही देश का होगा।

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