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नई दिल्लीः आईपीएल सीजन-11 जब शुरू हुआ था तो ऐसा लगने लगा कि हर बार फिसड्डी टीम साबित होने वाली दिल्ली डेयरडेविल्स टीम इस बार अच्छा प्रदर्शन करेगी, क्योंकि टीम की कमान गाैतम गंभीर के हाथों में थी। गंभीर ने वादा किया था कि वो टीम को चैंपियन बनाएंगे लेकिन शुरूआती मैचों में लगातार हार मिलने के कारण टीम 14 मैचों में 5 मैच जीतकर 10 अंकों के साथ निचले स्थान पर रही। टूर्नामेंट खत्म होेने के बाद गौतम ने एक अखबार में लिखे अपने कॉलम में दिल्ली टीम की हार आैर चेन्नई का चैंपियन बनने का कारण बताया। 

गंभीर ने लिखा- ‘फ्रेंचाइजी क्रिकेट की दुनिया में बहुत कुछ चलता है। यह एक महंगा बिजनेस है, जहां फ्रेंचाइजी फीस, प्लेयर्स और सपोर्ट स्टाफ की सैलरी, ट्रैवल और ठहरने का किराया जैसे कई खर्च होते हैं। एक और चीज है जो किसी भी बैलंस शीट में नजर नहीं आती। वह है ईगो (अहं)। ज्यादातर फ्रेंचाइजी मालिक आईपीएल के बाहर अपने-अपने क्षेत्र के सफल लोग हैं। क्रिकेटर्स की ही तरह उन्हें भी हार से नफरत है। लेकिन जहां क्रिकेटर्स हार को खेल भावना के तहत लेते हैं, वहीं टीम मालिक इस मामले में निर्मम होते हैं, क्योंकि वे हर चीज को रिटर्न ऑन इनवेस्टमेंट (निवेश पर रिटर्न) के पैमाने से देखते हैं।’ 

धोनी लेते हैं खुद फैसला
गंभीर ने चेन्नई की सफलता की वजह बताई है। उनके अनुसार चेन्नई की टीम आईपीएल में लगातार अच्छा करती है क्योंकि टीम के क्रिकेटिंग फैसलों में मालिकान की नहीं चलती। वहां हर फैसला सिर्फ धोनी लेते हैं, जबकि अन्य टीमों के साथ ऐसा नहीं है। उनके फैसलों में मालिकों का हस्तक्षेप ज्यादा होता है। उन्होंने कहा, ‘जो हालात हैं, उसे देखते हुए ऑन-फील्ड मैटर में हस्तक्षेप पर मालिक को दोषी करार देंगे, लेकिन चेन्नई की कहानी एकदम अलग है। एमएस धोनी वहां इकलौते बॉस हैं। मैं धोनी से ही सुना है कि वहां क्रिकेटिंग फैसलों में कॉरपोरेट का कोई हस्तक्षेप नहीं होता है।’

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