गॉल: श्रीलंका के खिलाफ गॉल टेस्ट में शानदार प्रदर्शन कर भारतीय टीम में वापसी करने वाले देवदत्त पडिक्कल ने अपने करियर का लक्ष्य साफ कर दिया है। 167 और 44 रन की पारियां खेलने वाले बाएं हाथ के बल्लेबाज ने कहा कि टेस्ट क्रिकेट में खुद को स्थापित करना उनकी सबसे बड़ी प्राथमिकता है। उन्होंने बताया कि वह लगातार अपनी तकनीक पर काम कर रहे हैं ताकि लंबे प्रारूप के लिए खुद को तैयार रख सकें।
वापसी के साथ ही छा गए पडिक्कल
देवदत्त पडिक्कल ने गॉल में श्रीलंका के खिलाफ जारी पहले टेस्ट में शानदार बल्लेबाजी करते हुए 167 रन की पारी खेली। यह टेस्ट क्रिकेट में उनकी अब तक की सबसे बड़ी पारियों में से एक रही। इसके अलावा उन्होंने दूसरी पारी में भी 44 रन बनाए। पडिक्कल की यह वापसी इसलिए भी खास रही क्योंकि वह 2024-25 बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी के पर्थ टेस्ट के बाद पहली बार भारतीय टेस्ट टीम में लौटे थे। उन्होंने मिले मौके को पूरी तरह भुनाते हुए टीम में अपनी दावेदारी मजबूत कर दी है।
‘टेस्ट क्रिकेट मेरा सबसे बड़ा लक्ष्य’
दिन का खेल खत्म होने के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में पडिक्कल ने कहा कि वह हमेशा से टेस्ट क्रिकेट में खुद को स्थापित करना चाहते हैं। उन्होंने बताया कि इसी वजह से उन्होंने अपनी बल्लेबाजी तकनीक को इस तरह विकसित करने की कोशिश की है, जिससे वह लंबे प्रारूप में सफल हो सकें।
पडिक्कल ने कहा, 'मैं हमेशा से जानता रहा हूं कि टेस्ट क्रिकेट मेरा सबसे बड़ा लक्ष्य है। इसलिए मैंने अपने खेल को इस तरह तैयार करने की कोशिश की है कि मैं अपनी बुनियादी तकनीक से बहुत दूर न जाऊं। मैं यह सुनिश्चित करता हूं कि रेड-बॉल क्रिकेट में खेलने के लिए हमेशा तैयार रहूं, क्योंकि यह मेरी पहली प्राथमिकता है।'
तकनीक में किया बदलाव
पडिक्कल ने टेस्ट क्रिकेट की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए अपनी बल्लेबाजी पर काम किया है। उनका जोर अपनी बेसिक तकनीक को मजबूत रखने और अलग-अलग फॉर्मेट के बीच आसानी से बदलाव करने पर रहा है। गॉल में उनकी 167 रन की पारी ने दिखाया कि वह लंबे समय तक क्रीज पर टिककर बल्लेबाजी करने की क्षमता रखते हैं। पहली पारी में बड़ी शतकीय पारी खेलने के बाद दूसरी पारी में 44 रन बनाकर उन्होंने अपनी निरंतरता भी दिखाई।
भारत जीत से सिर्फ चार विकेट दूर
गॉल टेस्ट में भारतीय टीम जीत की दहलीज पर पहुंच चुकी है। भारत ने अपनी पहली पारी में बड़ी बढ़त हासिल करने के बाद दूसरी पारी में 193 रन बनाए और श्रीलंका के सामने 372 रन का लक्ष्य रखा। लक्ष्य का पीछा करने उतरी श्रीलंका की शुरुआत खराब रही। मोहम्मद सिराज ने सातवें ओवर में पहला विकेट हासिल किया, जबकि मानव सुथार ने पसिंदु सूर्यबंडारा को पहली ही गेंद पर आउट कर श्रीलंका का स्कोर 14/2 कर दिया। सुथार ने बाद में एक और विकेट लिया, जबकि प्रसिद्ध कृष्णा ने भी एक सफलता हासिल की।
चौथे दिन स्टंप्स तक श्रीलंका 84/4
चौथे दिन का खेल खत्म होने तक श्रीलंका ने 4 विकेट पर 84 रन बना लिए थे। कप्तान धनंजय डी सिल्वा 31 रन बनाकर नाबाद थे, जबकि सोनल दिनुषा 24 रन पर क्रीज पर मौजूद थे। भारत की ओर से मानव सुथार ने दो विकेट लिए, जबकि मोहम्मद सिराज और प्रसिद्ध कृष्णा को एक-एक सफलता मिली। अब भारत को टेस्ट जीतने के लिए छह विकेट और लेने थे, जबकि श्रीलंका को जीत के लिए अंतिम दिन 288 रन बनाने थे।