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नई दिल्ली : भारतीय क्रिकेट टीम में लगातार बढ़ रही खिलाड़ियों की चोटों ने अब भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) की चिंता बढ़ा दी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, श्रीलंका टेस्ट सीरीज के बाद बोर्ड टीम इंडिया के मेडिकल और सपोर्ट स्टाफ की समीक्षा करेगा। खासतौर पर हेड फिजियो कमलेश जैन की भूमिका जांच के दायरे में है। कप्तान शुभमन गिल और मुख्य कोच गौतम गंभीर भी खिलाड़ियों की लगातार चोटों से संतुष्ट नहीं बताए जा रहे हैं।

लगातार चोटों ने बढ़ाई BCCI की चिंता

हाल के महीनों में टीम इंडिया के कई अहम खिलाड़ी चोटिल हुए हैं। तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह घुटने की चोट के कारण श्रीलंका दौरे से बाहर हो गए हैं। इससे पहले हर्षित राणा और नितीश कुमार रेड्डी भी चोट के चलते दो मैचों की टेस्ट सीरीज से बाहर हो चुके हैं।वहीं स्टार ऑलराउंडर वॉशिंगटन सुंदर पहले टेस्ट से बाहर हैं और दूसरे टेस्ट में भी उनके खेलने पर संशय बना हुआ है। लगातार बढ़ती इन चोटों ने चयनकर्ताओं और टीम प्रबंधन की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।

कमलेश जैन की भूमिका पर उठे सवाल

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, टीम इंडिया के हेड फिजियो कमलेश जैन की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि कप्तान शुभमन गिल और मुख्य कोच गौतम गंभीर चाहते हैं कि खिलाड़ियों की फिटनेस और रिकवरी प्रक्रिया की गंभीरता से समीक्षा हो। सूत्र के अनुसार, 'हेड फिजियो कमलेश जैन और सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (CoE) के विशेषज्ञों की भूमिका भी जांच के दायरे में है। कप्तान और कोच लगातार पूरी तरह फिट प्लेइंग इलेवन नहीं उतार पा रहे हैं, जो टीम के लिए चिंता का विषय है।'

'खिलाड़ी खुद को ज्यादा पुश कर रहे हैं'

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि टीम इंडिया में जगह बनाए रखने की कड़ी प्रतिस्पर्धा के कारण खिलाड़ी अपनी शारीरिक क्षमता से अधिक दबाव डाल रहे हैं। सूत्र ने कहा, 'हर स्थान के लिए कड़ी प्रतिस्पर्धा है, इसलिए खिलाड़ी खुद को लगातार पुश करते हैं। ऐसे में सपोर्ट स्टाफ और CoE की जिम्मेदारी है कि समय रहते खतरे के संकेत पहचानें और खिलाड़ियों को जल्दबाजी में मैदान पर वापस न भेजें। अब जवाबदेही तय करने का समय आ गया है।'

श्रीलंका सीरीज के बाद होगी समीक्षा

रिपोर्ट के मुताबिक, श्रीलंका के खिलाफ दो टेस्ट मैचों की सीरीज समाप्त होने के बाद BCCI सपोर्ट स्टाफ की विस्तृत समीक्षा करेगा। इस दौरान हेड फिजियो कमलेश जैन और टीम डॉक्टर डॉ. रिजवान खान की भूमिका का भी आकलन किया जाएगा। BCCI की नजर इस बात पर होगी कि खिलाड़ियों की फिटनेस, रिकवरी और वर्कलोड मैनेजमेंट में कहीं कोई कमी तो नहीं रह गई, खासकर तब जब टीम 2027 वनडे विश्व कप की तैयारियों में जुटी हुई है।