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स्पोर्ट्स डेस्क : कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय एथलीटों ने वह कर दिखाया है जो पिछले नौ दशकों में नहीं हुआ था। अस्मिता डे और हर्ष सिंह ने जूडो में स्वर्ण पदक (Gold Medal) जीतकर इतिहास रच दिया है। 1934 में पहली बार इन खेलों में भाग लेने के बाद से, भारत को जूडो में स्वर्ण पदक के लिए 92 साल का लंबा इंतजार करना पड़ा, जिसे इन दो सितारों ने समाप्त कर दिया है।

अस्मिता ने एक्स्ट्रा टाइम में मारी बाजी
महिलाओं की 48 किलोग्राम वर्ग प्रतियोगिता के फाइनल में अस्मिता डे का सामना कनाडा की हाइडी क्वाच से हुआ। मुकाबला बेहद रोमांचक रहा और फुल टाइम तक दोनों एथलीट बराबरी पर थे। खेल को एक्स्ट्रा टाइम में ले जाया गया, जहां नियम के अनुसार पहले स्कोर करने वाला विजेता होता है। अस्मिता ने शानदार कौशल दिखाते हुए पहले स्कोर किया और भारत की झोली में ऐतिहासिक गोल्ड डाल दिया।

हर्ष सिंह बने पहले भारतीय पुरुष गोल्ड मेडलिस्ट
दूसरी ओर, पुरुषों के 60 किलोग्राम वर्ग में हर्ष सिंह ने अपना दबदबा कायम रखा। उन्होंने फाइनल मुकाबले में ऑस्ट्रेलिया के जोशुआ काट्ज को 10-0 के बड़े अंतर से एकतरफा शिकस्त दी। इसी के साथ हर्ष कॉमनवेल्थ गेम्स में जूडो में स्वर्ण पदक जीतने वाले भारत के पहले पुरुष एथलीट बन गए हैं।

पदक तालिका में भारत की छलांग
इन दो स्वर्णिम जीतों के साथ ही भारत पदक तालिका में आठवें नंबर पर आ गया है। भारत के पास अब कुल 19 पदक हो गए हैं, जिनमें 5 गोल्ड, 10 सिल्वर और 4 ब्रॉन्ज मेडल शामिल हैं।

यामिनी मौर्य से भी स्वर्ण की उम्मीद
जूडो में भारत का विजय रथ यहीं रुकने वाला नहीं है। अब सबकी नजरें यामिनी मौर्य पर टिकी हैं, जो महिलाओं की 57 किलोग्राम वर्ग के फाइनल में पहुंच चुकी हैं। उनका मुकाबला इंग्लैंड की एसिला टोपराक से होगा, जहां भारत को एक और स्वर्ण पदक की प्रबल उम्मीद है।