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स्पोर्ट्स डेस्क : भारत की महिला कंपाउंड तीरंदाजी टीम को आर्चरी वर्ल्ड कप 2026 के चौथे चरण में रजत पदक से संतोष करना पड़ा। ज्योति सुरेखा वेन्नम, प्रिथिका प्रदीप और चिकिथा तनीपार्थी की तिकड़ी फाइनल में कोलंबिया से 228-232 से हार गई। हालांकि इस सिल्वर मेडल के साथ भारत ने टूर्नामेंट में अपना पदक खाता खोल दिया।

फाइनल में कोलंबिया ने पलटा मुकाबला

मैड्रिड में खेले गए महिला कंपाउंड टीम स्पर्धा के फाइनल में दुनिया की तीसरे नंबर की भारतीय टीम से बेहतर प्रदर्शन करते हुए 14वीं रैंकिंग वाली कोलंबिया ने 232-228 से जीत दर्ज की। भारतीय टीम मुकाबले में लय हासिल नहीं कर सकी और कोलंबियाई तीरंदाजों ने शानदार निशानेबाजी के दम पर खिताब अपने नाम किया।

ज्योति सुरेखा का प्रदर्शन रहा निराशाजनक

भारतीय टीम की सबसे अनुभवी तीरंदाज ज्योति सुरेखा वेन्नम इस मुकाबले में उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर सकीं। उन्होंने अपने आठ तीरों में केवल तीन बार ही 10 अंक हासिल किए, जिसका असर टीम के कुल स्कोर पर पड़ा। वहीं 17 वर्षीय प्रिथिका प्रदीप ने शानदार प्रदर्शन करते हुए छह बार 10 अंक का निशाना लगाया और टीम की ओर से सबसे प्रभावशाली तीरंदाज रहीं।

कोलंबिया की उस्कियानो बनीं जीत की हीरो

कोलंबिया की अलेजांद्रा उस्कियानो ने पूरे मुकाबले में बेहतरीन निशानेबाजी की। उन्होंने लगातार आठ बार 10 अंक का निशाना साधा, जो दोनों टीमों के बीच सबसे बड़ा अंतर साबित हुआ। पूर्व विश्व चैंपियन सारा लोपेज का प्रदर्शन उतार-चढ़ाव भरा रहा, लेकिन उस्कियानो ने टीम को पूरे मुकाबले में बढ़त दिलाए रखी।

भारत के पास अभी और पदक जीतने का मौका

भारत का अभियान अभी खत्म नहीं हुआ है। किशोर तीरंदाज प्रिथिका प्रदीप महिला कंपाउंड व्यक्तिगत स्पर्धा के सेमीफाइनल में पहुंच चुकी हैं और अब एक जीत उन्हें कम से कम रजत पदक दिला देगी। इसके अलावा रिकर्व वर्ग में भी भारत की उम्मीदें बरकरार हैं। युवा तीरंदाज कीर्ति शर्मा रिकर्व व्यक्तिगत स्पर्धा के सेमीफाइनल में पहुंच चुकी हैं। वहीं वह धीरज बोम्मदेवरा के साथ रिकर्व मिश्रित टीम के कांस्य पदक मुकाबले में भी उतरेंगी। ऐसे में कीर्ति के पास दो पदक जीतने का मौका है।

सीजन की शुरुआत में जीता था स्वर्ण

भारतीय महिला कंपाउंड टीम ने इसी साल अप्रैल में मैक्सिको के पुएब्ला में आयोजित आर्चरी वर्ल्ड कप के पहले चरण में स्वर्ण पदक जीता था। हालांकि इस बार फाइनल में टीम उस प्रदर्शन को दोहरा नहीं सकी और रजत पदक से संतोष करना पड़ा।