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स्पोर्ट्स डेस्क : भारतीय पहलवान रवि कुमार दहिया को पुरुषों के 57 किग्रा भार वर्ग के फाइनल में रूस के जावुर युवुगेव से 4-7 से हार के बाद रजत पदक से संतोष करना पड़ा। नाहरी, सोनीपत में 12 दिसंबर 1997 शांत रहते हैं और काफी कम बोलते हैं लेकिन 2008 के ओलिंपिक के दौरान ओलंपिक में पदक जीतने के बारे में कहा था। 

रवि के पिता ने एक न्यूज एजेंसी को बताया था कि छत्रसाल अकादमी में स्नातक होने से पहले रवि अपने बचपन की कुश्ती अकादमियों में स्पष्ट रूप से सबसे शांत छात्र थे। उन्होंने कहा, 'रवि बहुत ही शांत लड़का था। वह जोर से बात भी नहीं करता था। लेकिन 2008 के ओलिंपिक के दौरान जब सुशील ने कांस्य पदक जीता था तो वह उठकर बोला कि वह भी ऐसा ही करेंगे। 

10 साल की उम्र में रवि ने पहली बार कुश्ती खेलनी शुरू की थी। नॉर्थ दिल्ली के छत्रसाल स्टेडियम में प्रैक्टिस करते उनके कई साल बीते। पिता राकेश दहिया जोकि खेतों में मजदूरी करते थे, बेटे के लिए रोज नाहरी से स्टेडियम तक का सफर तय करते थे ताकि वह ताजा दूध और फल बेटे तक पहुंचा सकें। अमित दहिया भी नाहरी गांव से हैं। रवि कहते हैं- अमित भाई से मैंने बहुत कुछ सीखा। जब भी कोई मुश्किल आई उन्होंने जरूरी टिप्स देने में हिचक नहीं दिखाई। 

विजेता 

विश्व चैम्पियनशिप 2019 में ब्रॉन्ज
एशियन चैम्प्यिनशिप में 2 गोल्ड
टोक्यो ओलंपिक 2020 सिल्वर मेडल 

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