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स्पोर्ट्स डेस्क : अंडर-19 वर्ल्ड कप फाइनल 2026 भारतीय क्रिकेट इतिहास के सबसे यादगार लम्हों में शामिल हो गया, जब युवा सनसनी वैभव सूर्यवंशी ने इंग्लैंड के खिलाफ रिकॉर्डतोड़ शतक जड़कर दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। सिर्फ 14 साल की उम्र में वैभव ने न केवल फाइनल जैसे बड़े मंच पर शतक लगाया, बल्कि कई बड़े भारतीय और विश्व रिकॉर्ड भी अपने नाम कर लिए। उनकी निडर बल्लेबाज़ी ने यह साबित कर दिया कि भारतीय क्रिकेट का भविष्य सुरक्षित हाथों में है।

फाइनल में 55 गेंदों पर विस्फोटक शतक

इंग्लैंड के खिलाफ खिताबी मुकाबले में वैभव सूर्यवंशी ने 55 गेंदों में शतक पूरा कर इतिहास रच दिया। यह अंडर-19 वर्ल्ड कप 2026 में भारत की ओर से लगाया गया सबसे तेज शतक है। बड़े दबाव वाले फाइनल में इतनी आक्रामक बल्लेबाज़ी करना किसी भी खिलाड़ी के लिए आसान नहीं होता, लेकिन वैभव ने शुरुआत से ही अपने इरादे साफ कर दिए। उन्होंने सटीक टाइमिंग, बेहतरीन फुटवर्क और आत्मविश्वास के साथ इंग्लिश गेंदबाज़ों को बैकफुट पर धकेल दिया।

सबसे कम उम्र में फाइनल शतक

इस शतकीय पारी के साथ वैभव सूर्यवंशी भारत की ओर से अंडर-19 वर्ल्ड कप फाइनल में शतक लगाने वाले सबसे कम उम्र के बल्लेबाज़ बन गए। 14 साल की उम्र में इस तरह का कारनामा उन्हें खास बनाता है। इससे पहले किसी भी भारतीय बल्लेबाज़ ने इतनी कम उम्र में फाइनल मुकाबले में तीन अंकों का आंकड़ा नहीं छुआ था। क्रिकेट विशेषज्ञों के मुताबिक, वैभव की यह उपलब्धि आने वाले वर्षों तक एक बेंचमार्क के तौर पर याद की जाएगी।

एक सीजन में सबसे ज्यादा छक्कों का रिकॉर्ड

वैभव की शतकीय पारी सिर्फ रन बनाने तक सीमित नहीं रही। अपनी इनिंग के दौरान जैसे ही उन्होंने पांचवां छक्का जड़ा, वह अंडर-19 वर्ल्ड कप के एक ही सीज़न में सबसे ज्यादा छक्के लगाने वाले बल्लेबाज़ बन गए। उनकी पावर हिटिंग पूरे टूर्नामेंट में चर्चा का विषय रही। स्पिन हो या तेज़ गेंदबाज़ी, वैभव ने हर तरह के अटैक के खिलाफ बड़े शॉट्स खेलने की क्षमता दिखाई। 

29 छक्के – वैभव सूर्यवंशी, 2026
18 छक्के – डेवाल्ड ब्रेविस, 2022
15 छक्के – जैक बर्नहैम, 2016
14 छक्के – माइकल हिल, 2008
14 छक्के – निकोलस पूरन, 2014

तकनीक और मानसिक मजबूती का बेहतरीन मिश्रण

वैभव सूर्यवंशी की बल्लेबाज़ी सिर्फ आक्रामकता पर आधारित नहीं है। उनकी तकनीक संतुलित है और शॉट चयन काफी परिपक्व नजर आता है। फाइनल जैसे बड़े मुकाबले में उन्होंने धैर्य और आक्रमण का सही संतुलन बनाए रखा। यही वजह है कि क्रिकेट पंडित उन्हें उम्र से कहीं ज्यादा मैच्योर खिलाड़ी मान रहे हैं।