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स्पोर्ट्स डेस्क : भारतीय टेस्ट क्रिकेट इस समय कठिन दौर से गुजर रहा है। घरेलू मैदान पर साउथ अफ्रीका के खिलाफ सीरीज़ हार और लगातार कमजोर नतीजों ने टीम मैनेजमेंट को कटघरे में खड़ा कर दिया है। खासतौर पर हेड कोच गौतम गंभीर की टेस्ट कोच के तौर पर भूमिका पर सवाल उठने लगे हैं। इसी बीच साउथ अफ्रीका के टेस्ट कप्तान टेम्बा बावुमा का बयान सामने आया है, जिसमें उन्होंने न सिर्फ गंभीर का बचाव किया, बल्कि स्प्लिट-कोचिंग मॉडल पर भी खुलकर अपनी राय रखी है।

भारत के टेस्ट प्रदर्शन पर उठते सवाल

पिछले कुछ समय में भारतीय टेस्ट टीम का ग्राफ तेजी से नीचे आया है। ऑस्ट्रेलिया दौरे पर हार, फिर घरेलू मैदान पर न्यूजीलैंड और साउथ अफ्रीका के खिलाफ सीरीज़ गंवाना, ये सभी नतीजे भारत जैसी मजबूत टेस्ट टीम के लिए असामान्य माने जा रहे हैं। फैंस और पूर्व क्रिकेटर मानने लगे हैं कि रेड-बॉल क्रिकेट में रणनीति और दिशा की कमी साफ दिख रही है। इसी वजह से कोचिंग सेटअप, खासकर गौतम गंभीर की भूमिका, चर्चा के केंद्र में है।

टेम्बा बावुमा का गंभीर को समर्थन

ESPNcricinfo के लिए लिखे अपने कॉलम में टेम्बा बावुमा ने भारत की मौजूदा स्थिति को “ट्रांज़िशन फेज़” बताया। उन्होंने कहा कि भारत अभी वैसा ही दौर देख रहा है, जैसा साउथ अफ्रीका ने 2019 के आसपास झेला था। बावुमा के मुताबिक, ऐसे समय में कोच या मैनेजमेंट पर जल्दबाज़ी में सवाल उठाना सही नहीं है। उन्होंने इशारों में कहा कि गंभीर जैसे अनुभवी क्रिकेट दिमाग को समय देना ज़रूरी है।

स्प्लिट-कोचिंग मॉडल पर कड़ा रुख

भारतीय क्रिकेट में एक बार फिर रेड-बॉल और व्हाइट-बॉल के लिए अलग-अलग कोच रखने की मांग उठ रही है। हालांकि बावुमा इस विचार के सख्त खिलाफ नजर आए। उन्होंने बताया कि साउथ अफ्रीका ने 2023 में स्प्लिट-कोचिंग मॉडल अपनाया था, लेकिन इसका अनुभव सकारात्मक नहीं रहा। खिलाड़ियों को अलग-अलग सीरीज़ के बीच अलग कोचिंग स्टाइल और सोच के साथ तालमेल बैठाने में मुश्किल हुई, जिससे कन्फ्यूजन बढ़ा।

“एक कोच, सभी फॉर्मेट” क्यों बेहतर?

बावुमा का मानना है कि एक ही कोच का सभी फॉर्मेट में होना निरंतरता के लिहाज़ से ज्यादा फायदेमंद है। इससे खेलने की फिलॉसफी, टीम कल्चर और खिलाड़ियों की भूमिका साफ रहती है। उन्होंने कहा कि आज के व्यस्त इंटरनेशनल कैलेंडर में, जहां खिलाड़ी लगातार फॉर्मेट बदलते हैं, स्प्लिट सिस्टम उल्टा असर डाल सकता है। यही वजह है कि अब ज्यादातर टीमें इस मॉडल से दूर जा रही हैं।

गौतम गंभीर का रिकॉर्ड और भविष्य

गौतम गंभीर का कॉन्ट्रैक्ट 2027 वनडे वर्ल्ड कप तक है। उनकी कोचिंग में भारत ने व्हाइट-बॉल क्रिकेट में शानदार प्रदर्शन किया है—चैंपियंस ट्रॉफी जीत और T20I बाइलेटरल सीरीज़ में अजेय रिकॉर्ड इसका सबूत है। हालांकि टेस्ट क्रिकेट में नतीजे निराशाजनक रहे हैं। बावुमा का मानना है कि भारत को इस मुश्किल दौर में गंभीर पर भरोसा बनाए रखना चाहिए, क्योंकि ट्रांज़िशन के बाद टीम फिर मज़बूत होकर लौट सकती है।