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बेंगलुरु : इस सप्ताहांत बेंगलुरु में होने वाले डेविस कप मुकाबले में भारत और नीदरलैंड की टीमें सिर्फ एक-दूसरे के खिलाफ ही नहीं उतरेंगी, बल्कि उन्हें टेनिस की सबसे कठिन परिस्थितियों में से एक — ऊंचाई — से भी जूझना होगा।

भारत का सबसे ऊंचाई पर स्थित टेनिस स्थल

समुद्र तल से करीब 900 मीटर (2,950 फीट) की ऊंचाई पर स्थित बेंगलुरु भारत का सबसे ऊंचाई पर स्थित टेनिस आयोजन स्थल है। यह पुणे (550 मीटर) से भी काफी अधिक ऊंचाई पर है। हालांकि यह क्विटो (2,850 मीटर) या ला पाज (3,500 मीटर) जितना चुनौतीपूर्ण नहीं है, लेकिन इतनी ऊंचाई भी खेल पर बड़ा असर डाल सकती है।

गेंद की गति और उछाल पर पड़ता है असर

ऊंचाई पर हवा का असर सीधे तौर पर गेंद की स्पीड और उछाल पर पड़ता है। शॉट्स तेजी से निकलते हैं और गेंद ज्यादा उछलती है। समुद्र तल पर जो रैली नियंत्रण में नजर आती है, वही बेंगलुरु में अचानक लंबी जा सकती है। डेविस कप जैसी टीम प्रतियोगिता में, जहां गलती की गुंजाइश बेहद कम होती है, यह फर्क निर्णायक साबित हो सकता है।

रैकेट की तारों में करना होगा बदलाव

इन परिस्थितियों में खिलाड़ियों को सबसे पहले रैकेट की स्ट्रिंग टेंशन में बदलाव करना पड़ता है। अधिक ऊंचाई पर गेंद तेज जाती है, इसलिए आमतौर पर खिलाड़ी तारों को सामान्य से ज्यादा कड़ा रखते हैं। ढीली तारें ‘ट्रैम्पोलिन इफेक्ट’ बढ़ा देती हैं, जिससे नियंत्रण कम हो जाता है और गलतियों की संभावना बढ़ती है।

कुछ शॉट्स मुश्किल, कुछ आसान

ऊंचाई पर कुछ शॉट्स खेलना कठिन हो जाता है, जबकि कुछ अपेक्षाकृत आसान। ऐसी परिस्थितियों में दमदार सर्विस करने वाले और बेसलाइन से मजबूत रिटर्न खेलने वाले खिलाड़ियों को बढ़त मिलती है।

शरीर पर भी पड़ता है ऊंचाई का असर

गेंद के अलावा ऊंचाई का असर खिलाड़ियों के शरीर पर भी पड़ता है। हवा में ऑक्सीजन कम होने के कारण खिलाड़ी उम्मीद से जल्दी थक सकते हैं, खासकर लंबे मुकाबलों और लंबी रैलियों में। ऐसे में अंकों और गेम के बीच रिकवरी भी ज्यादा चुनौतीपूर्ण हो जाती है।

तैयारी और अनुकूलन होगा निर्णायक

ऐसी परिस्थितियों में वही टीम फायदा उठाती है जो जल्दी पहुंचकर कई दिन अभ्यास करती है। ये अभ्यास सत्र सिर्फ शॉट्स तक सीमित नहीं होते, बल्कि खिलाड़ियों को सांस लेने, गति और शारीरिक रिकवरी में बदलाव करने में भी मदद करते हैं।

प्रतिभा नहीं, सामंजस्य तय करेगा बाज़ी

ऊंचाई यह तय नहीं करती कि बेहतर टेनिस खिलाड़ी कौन है, लेकिन जो खिलाड़ी और टीम जल्दी परिस्थितियों से सामंजस्य बैठा लेते हैं, वे बेहतर स्थिति में होते हैं। बेंगलुरु में तैयारी, धैर्य और सटीकता उतनी ही अहम होगी जितनी कच्ची प्रतिभा।