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नई दिल्ली : भारतीय महिला क्रिकेट टीम के पाकिस्तान के साथ एक से 31 अक्तूबर तक द्विपक्षीय श्रृंखला नहीं खेलने के कारण 6 अंक काट दिए जाने से भारतीय क्रिकेट बोर्ड के शशांक मनोहर की अगुवाई वाली आईसीसी के साथ संबंध और कड़वे हो गए हैं।  

महिला क्रिकेटरों को नियमों का हवाला देकर ‘आसान निशाना’ बनाए जाने के विरोध में संभावना है कि भारत की पुरूष टीम अगले साल इंगलैंड में होने वाली चैंपियन्स ट्राफी में नहीं खेले। आईसीसी के रवैये से बीसीसीआई नाराज है और और उसने इस वैश्विक संस्था में विरोध दर्ज कराया जो इस बात से अच्छी तरह वाकिफ है कि वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य में पाकिस्तान के खिलाफ किसी भी द्विपक्षीय श्रृंखला के लिए सरकर की मंजूरी जरूरी होती है। आईसीसी के भारतीय चेयरमैन इस बात को अच्छी तरह से समझते हैं। 

बीसीसीआई के एक सीनियर अधिकारी ने कहा कि आईसीसी इससे अच्छी तरह वाकिफ है कि वर्तमान परिस्थितियों में जबकि भारतीय सैनिक शहीद हो रहे हैं तब पाकिस्तान के खिलाफ खेलना संभव नहीं है। चेयरमैन को अच्छी तरह से पता है कि हमारे लिये सरकार से मंजूरी लेना जरूरी है। उन्होंने कहा कि गुप्त मकसद से उठाया गया यह कदम पाकिस्तान के हाथों में खेलने की कोशिश है। वे कहेंगे कि यदि महिला खेल सकती है तो पुरूष टीम भी खेल सकती है। यदि आईसीसी ने अपना फैसला नहीं बदला तो हमारी पुरूष टीम भी महिला टीम के साथ है और वे चैंपियन्स ट्राफी में नहीं खेलेगी।