नागपुर : आगामी विदर्भ प्रीमियर लीग (VPL) टी20 सीजन से पहले गत विजेता नीको मास्टर ब्लास्टर के कप्तान जितेश शर्मा ने खिताब बचाने के दबाव, लगातार सफलता के लिए जरूरी मानसिकता और इस सीजन खिलाड़यिों से अपनी उम्मीदों को लेकर खुलकर बात की। पिछले सीजन टीम को चैंपियन बनाने वाले जितेश का मानना है कि किसी खिताब का बचाव करना, उसे जीतने की कोशिश करने से बिल्कुल अलग मानसिक चुनौती होती है।
उन्होंने कहा, 'बात अगर टाइटल डिफेंड करने की हो तो अतिरिक्त दबाव आ ही जाता है।मुझे लगता है कि जब आप किसी चीज का पीछा करते हैं, तो हमेशा सोचते हैं कि अगला कदम क्या होना चाहिए। इससे आपकी मानसिकता बदल जाती है।' उन्होंने आगे कहा, 'जब आप जीतने या ट्रॉफी हासिल करने के लिए खेलते हैं, तो हमेशा मैच जीतने की योजना बनाते हैं, लेकिन जब आप खिताब बचाने के बारे में सोचते हैं, तो दिमाग में यह आता है कि हर हाल में जीतना ही जीतना है और इससे आपकी मानसिकता पर फकर् जरूर पड़ता है।'
पिछले सीजन की सफलता दोहराने के सवाल पर जितेश ने कहा, 'मुझे लगता है कि वही साधारण और बुनियादी चीजें बार-बार करते रहना जरूरी है' उन्होंने लगातार सफलता के पीछे की प्रक्रिया समझाते हुए कहा कि, 'कप्तान के तौर पर मैंने हमेशा अपनी टीम में आजादी, निडरता और भरोसे के माहौल पर जोर दिया। मैं हमेशा सभी से कहता हूं नेचुरल रहो, निडर रहो, प्रदर्शन चाहे जैसा भी हो, मैं हमेशा तुम्हारे साथ हूं। मैदान पर तुम जो भी फैसला लोगे, मुझे भरोसा है कि वह टीम के हित में होगा और मैं उसका सम्मान करूंगा। अगर तुम असफल भी हुए, तब भी मैं तुम्हारे साथ खड़ा रहूंगा। और अगर सफल हुए, तब भी मेरी शाबाशी मिलेगी।'
नीको मास्टर ब्लास्टर के कप्तान ने यह भी स्पष्ट करते हुए कहा कि, 'मेरा फोकस सिर्फ नतीजों पर नहीं, बल्कि खिलाड़यिों के विकास पर भी है। मैं बस चाहता हूं कि इस लीग में खिलाड़ी 2-3 प्रतिशत बेहतर बनें। मैं उनसे बहुत ज्यादा उम्मीद नहीं कर रहा। मैं सिफर् चाहता हूं कि लीग के अंत तक, एक इंसान और एक क्रिकेटर के तौर पर वे 10 प्रतिशत बेहतर हो जाएं।'
उन्होंने आगे कहा, 'प्रदर्शन के बारे में ज्यादा सोचने के बजाय उन्हें अपने कौशल, मानसिक मजबूती और शारीरिक फिटनेस पर ध्यान देना चाहिए। साथ ही उनमें जोखिम लेने का साहस भी बढ़ना चाहिए। यही मेरी उनसे उम्मीद है।'
टीम :
जितेश शर्मा, अध्ययन डागा, आर्यन मेश्राम, शनमेश देशमुख, अननमय जायसवाल, वेदांत दिघाडे, वैभव चांदेकर, अभिषेक गुप्ता, शांतनु राजपूत, दीपेश परवानी, हर्ष दुबे, अविनाश जाधव, आर्य दुरुगकर, गौरव धोबले, गौरव फर्डे और कुश खंडेलवाल