बेंगलुरू : रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरू (RCB) के क्रिकेट निदेशक मो बोबाट का कहना है कि IPL में टीम का जबरदस्त फॉर्म उस 'शिकारी जैसी सोच' के कारण है जिसकी वजह से पिछली बार खिताब जीतने के बावजूद टीम आत्ममुग्धता से बची रही । आरसीबी इस साल प्लेआफ में पहुंचने वाली पहली टीम बन गई जिसके 18 अंक है। अभी उसे एक मैच और खेलना है और वह शीर्ष पर बने रहने की कोशिश में होगी।
बोबाट ने RCB की पहल 'लैब्स इंडियन स्पोर्ट समिट' में चुनिंदा मीडिया से कहा, 'मैं यह महसूस नहीं करना चाहता मानो हमने माउंट एवरेस्ट फतेह कर लिया हो (पिछले साल खिताब जीतने पर )। हम चढ़ते रहना चाहते हैं। शिकार जारी रहना चाहिए। हम आपस में इसी तरह बात करते हैं कि शिकारी जैसी सोच बनी रहनी चाहिए।' उन्होंने कहा, 'मेरे लिए और यहां तक कि सीनियर खिलाड़ियों के लिए भी, तेजी से खुद को ढालना, अपनी सोच को फिर से सेट करना और यह तय करना कि अब हम आगे किस चीज पर काम करने वाले हैं, यह सचमुच बहुत जरूरी है।'
इस प्रक्रिया का अहम भाग यह है कि डग आउट में हर तरह के खिलाड़ी हैं। अपार अनुभवी से लेकर पहला कदम रखने वाले युवा तक। बोबाट ने कहा, 'टीम में 19 साल का खिलाड़ी भी हो सकता है जिसने पहली बार IPL में कदम रखा और ऐसा भारतीय खिलाड़ी भी जो बरसों से देश के लिए खेल रहा है।' उन्होंने कहा, 'इसके अलावा एक आर्थिक माहौल भी है, जहां मेरा मानना है कि खिलाड़ियों की कमाई का उनकी असल कीमत से कोई लेना-देना नहीं होता। नीलामी में आपको जो कीमत मिलती है, वह आपकी असल कीमत नहीं होती। यह तो बस 'मांग और आपूर्ति' का खेल है।'
उन्होंने कहा, 'इसलिए ऐसा भी हो सकता है कि कोई अधिक अनुभवी और उपलब्धियां हासिल करने वाला खिलाड़ी, किसी नौसिखिए खिलाड़ी से कम कमा रहा हो क्योंकि असल में उस नौसिखिए के कौशल की ही उस समय अधिक मांग होती है।' बोबाट ने कहा, 'इन सभी को एक लक्ष्य के लिए साथ में लेकर प्रयास करना होता है। IPL में 8 से 10 दिन मिलते हैं लिहाजा यह आसान नहीं है लेकिन रोमांचक चुनौती है।'