नई दिल्ली, भारत — भारतीय महिला शतरंज इस समय वैश्विक स्तर पर नई ऊंचाइयों को छू रहा है, जहां आर वैशाली जैसी खिलाड़ी ऐतिहासिक उपलब्धियों के करीब हैं। ऐसे दौर में उभरती प्रतिभाएं भी देश के शतरंज भविष्य को मजबूत कर रही हैं। भारतीय शतरंज को एक अन्य तैतक खिलाड़ी मिला है और वह है दिल्ली शिविका रोहिल्ला जिन्होंने बीते दिनों महिला इंटरनेशनल मास्टर का खिताब हासिल कर लिया है .
दिल्ली में महिला शतरंज को आगे बढ़ाने में पहले तानिया सचदेव जैसी खिलाड़ियों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी, जिन्होंने 2000 के दशक में वुमन इंटरनेशनल मास्टर का खिताब हासिल किया। हालांकि इसके बाद लंबे समय तक दिल्ली से शीर्ष स्तर की महिला खिलाड़ियों की कमी महसूस की गई थी जिसे अब शिविका के आने से एक नई उम्मीद मिली है .
शिविका नें हंगरी के बुडापेस्ट में होने वाले प्रतिष्ठित फर्स्ट सैटरडे टूर्नामेंट में अपना पहला नॉर्म हासिल किया। इसके बाद ग्राडो टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन करते हुए 2200 रेटिंग पार की और दूसरा नॉर्म पूरा किया।
दौरान उन्होंने अनुभवी ग्रैंडमास्टर्स जैसे अभिजीत गुप्ता और विक्टर मिहालेव्स्की और भारतीय महिला टीम के कोच विशाल सरीन के मार्गदर्शन में प्रशिक्षण लिया है ।
सामुदायिक योगदान और पहल
शतरंज खेलने के अलावा शिविका शतरंज के मध्यम से भी सामाजिक बदलाव लाने की सोच रखती है और वह चेस कॉफी कनेक्ट जैसे मंच के जरिए शतरंज समुदाय को एकजुट कर रही है, जहां विशेष रूप से दिव्यांग खिलाड़ियों के लिए निःशुल्क भागीदारी और महिलाओं व वरिष्ठ नागरिकों के लिए विशेष रियायतें दी जाती हैं।