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स्पोर्ट्स डेस्क (राहुल): किसी के साथ किसी की तुलना करना बहुत आसान है, पर ऐसा करने से पहले यह सोचना भी जरूरी है कि वह कहां तक सटीक बैठती है। क्रिकेट के खेल में माैजूदा खिलाड़ियों में पुराने दिग्गजों की छवि देखना अाम बात हो गई है। बात पृथ्वी शाॅ की ही कर लें। उन्होंने अभी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कदम रखा ही है कि कई हस्तियां उन्हें वीरेंद्र सहवाग तो कई ब्राॅयन लारा कहने लगी हैं। वहीं, कप्तान विराट कोहली की तुलना 'God Of Cricket' सचिन से की जा रही है। इसमें कोई शक नहीं कि कोहली एक महान क्रिकेटर हैं, पर सचिन के साथ उनकी तुलना करना सही नहीं कहा जा सकता। सचिन अपने जमाने के बादशाह थे आैर कोहली माैजूदा समय के।
सचिन अपने जमाने के बादशाह रहे हैं आैर कोहली माैजूदा समय के, Virat Kohli and Sachin Tendulkar 

विंडीज के खिलाफ दूसरे वनडे में कोहली ने अपने वनडे करियर के 10 हजार रन पूरे किए। उन्होंने मात्र 213 मैचों में यह आंकड़ा छुआ आैर सचिन को पीछे छोड़ वनडे इतिहास में सबसे तेज 10 हजार रन बनाने वाले बल्लेबाज बन गए। सचिन ने 266 मैचों में यह कारनामा किया था। जैसे ही कोहली ने यह रिकॉर्ड बनाया, सोशल मीडिया पर सवाल उठना भी लाजिमी हो गया कि आखिर महान क्रिकेटर काैन हैं - सचिन या कोहली। अगर हम याद करें उस दाैर को जब सचिन विदेशी धरती पर 6-6 फीट के तेज गेंदबाजों का सामना करते थे तो आप पाएंगे कि उनका सामना करना कितना मुश्किल रहा होगा। उस दाैर में मैच प्रैक्टिस उस लेवल की नहीं होती जो माैजूदा समय में होती है।

सचिन के दाैर में शतक लगाना रहती थी बड़ी बात
 

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आईपीएल की शुरुआत से पहले गेंद आैर बल्ले में जो टक्कर देखने को मिलती थी, वो अब कहां मिलती है। बात करें 2006 के पहले समय की तो उस दाैर में अगर कोई बल्लेबाज शतक लगाता था तो हफ्ताभर वही सुर्खियों में रहता था। लेकिन आज के समय में शतक लगाना बड़ी बात नहीं। छठे नंबर का बल्लेबाज भी आसानी से 100 रनों का आंकड़ा पार कर लेता है। आपको याद होगा जब सचिन ने दुबई में 1998 में कोका कोला कप के फाइनल में आॅस्ट्रेलिया के खिलाफ 131 गेंदों में 134 रन बनाए थे, (जिसमें 12 चाैके आैर 3 छक्के रहे थे) जिसकी बदाैलत भारत ने 6 विकेट रहते टूर्नामेंट जीता था। बस यहां से ही सचिन का दाैर शुरू हुआ था। सचिन ने ग्लेन मैक्ग्रा, शेन वाॅर्न, वसीम अकरम आैर कर्टली एंब्रोस जैसे घातक गेंदबाजों का सामना कर कई रिकाॅर्ड स्थापित किए और वो भी कई बार बिना हेल्मेट पहने।

T20 ने बदली गेम, तभी रन बरसाना हुई आम बात

माैजूदा समय में टी20 क्रिकेट ऐसा पैर पसार चुका है कि गेम ज्यादातर बल्ले की ही रह गई। जहां एक समय वनडे में शतकीय पारी खेलना गजब की बात मानी जाती थी, वहां अाज बल्लेबाज टी20 क्रिकेट में 100 रनों की पारी खेलना बड़ी बात नहीं समझते। 2008 में आईपीएल व अन्य टी20 लीग के शुरू होने के बाद मानों ऐसा दाैर आ चुका है कि गेंदबाज के लिए ओवर खाली निकालना किसी सपने जैसा बन गया हो। आधुनिक तकनीक के चलते खिलाड़ियों ने बल्लेबाजी में वो सुधार किया, जो एक दशक पहले बल्लेबाज करने की चाहत रखते थे। कोहली ज्यादातर समय प्रैक्टिस में बिताते हैं। समय के साथ-साथ सभी चीजें बदलीं। प्रैक्टिस करना आसान हुआ आैर पिच भी अपने हिसाब से मिलने लगी। 

जिन गेंदबाजों का सचिन ने किया सामना वैसे गेंदबाज आज कहां
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हरभजन सिंह ने एक इंटरव्यू के दाैरान खुद कहा था कि जब 1998-99 में विदेशी दाैरे पर होते थे, तो रात को टीम की नींद उड़ जाती थी कि आखिर सुबह कैसे इन लंबे-लंबे खतरनाक गेंदबाजों का सामना किया जाएगा। विंडीज के इयान विशप, कर्टनी वाल्श आैर आॅस्ट्रेलिया के मैक्गा जैसे गेंदबाजों की गेंदें बल्लेबाजों के सिर के ऊपर से किसी तेज गोली जैसे गुजरती थी, जिनका सामना करने के लिए तकनीक ही नहीं, बल्कि हिम्मत की भी जरूरत रहती थी। जिन गेंदबाजों का सचिन ने सामना किया, वैसे गेंदबाज आज कहां हैं? अगर कोई छाप छोड़ता भी है तो वह 1-2 साल बाद फीका ही पड़ जाता है। 

350 का लक्ष्य आम बात, तो फिर शतक बनेंगे ही

कुछ सालों पहले जब विरोधी टीम 250 से कम भी लक्ष्य देती थी, तो उसका पीछा करने में सामने वाली टीम के पसीने छूट जाते थे। लेकिन अब ऐसा दाैर आ चुका है कि 350 का टारगेट देने के बाद भी टीम को जीत के लिए नाक रगड़ना पड़ जाता है। खिलाडी़ लंबे समय तक क्रीज पर डटे रहते हैं आैर कब वह शतक पूरा कर गए, पता नहीं चलता। वहीं, सचिन के दाैर में 200-250 के जवाब में शतक लगाना आैर विकेट बचाना बहुत बड़ी चुनाैती होती थी। 

काफी बदल चुका है क्रिकेट
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मौजूदा दौर में विराट कोहली की बल्लेबाजी की जितनी भी तारीफ की जाए कम है, लेकिन सचिन के साथ विराट कोहली की तुलना दुर्भाग्यपूर्ण है। विराट कोहली के खेलने का तरीका सचिन से काफी अलग है। सचिन अपने समय में बादशाह थे तो विराट अपने समय के बादशाह हैं। रोज क्रिकेट में कुछ न कुछ बदलाव होता रहता है। सचिन ने 1989 में अपना क्रिकेट करियर शुरू किया था, जबकि विराट कोहली ने 2008 में यानी करीब 20 साल के बाद। उस समय के क्रिकेट और आज के क्रिकेट में काफी बदलाव आ गया है। क्रिकेट के नियम बदल चुके हैं। ज्यादा से ज्यादा नियम बल्लेबाजों के हित में बनाए गए हैं।

रिकाॅर्ड तो बनते हैं टूटने के लिए फिर तुलना क्यों?

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सुनील गावस्कर ने जब भारत की तरफ से टेस्ट क्रिकेट में 10 हजार रन बनाए थे तो यही कहा जाता था कि उनका रिकाॅर्ड तोड़ना अब किसी अन्य भारतीय के लिए संभव नहीं होगा। लेकिन रिकाॅर्ड बनते हैं टूटने के लिए ही आैर सचिन ने गावस्कर का यह रिकाॅर्ड तोड़ इस बात पर मुहर भी लगाई। बाद में राहुल द्रविड़ ने भी यह आंकड़ा छुआ। अगर कोहली सचिन का कोई रिकाॅर्ड ध्वस्त करते हैं तो यह कहना उचित नहीं होगा कि वह वह सचिन से कई गुना बेहतर हैं, क्योंकि सचिन ने अपने दाैर में जो हासिल किया, उसका कोई तोड़ नहीं। वहीं, कोहली अपने समय के बादशाह हैं पर सचिन से ऊपर नहीं।  


 

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