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नई दिल्ली : सौरव गांगुली के बीसीसीआई के प्रेसिडेंट बनने के बाद प्रशासकों की समिति के चीफ विनोद राय ने कहा है इस पद के लिए सौरव गांगुली से अच्छा कोई उम्मीदवार नहीं था। एक इंटरव्यू के दौरान राय ने अनिल कुंबले को नेशनल कोच से हटाने, विराट कोहली और रवि शास्त्री की जोड़ी, सेक्सुअल हैरासमैंट और लोढ़ा समिति की सिफारिशों पर बातचीत की।

सवाल : सौरव गांगुली को आप अध्यक्ष के रूप में कैसे देखते हैं?
जवाब : मैं सौरव की बहुत इज्जत करता हूं। मेरे मन में उनके प्रति इज्जत और बढ़ गई थी जब मैंने उन्हें क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ बंगाल के काम करते देखा। उनके पास काबलियत है कि वह बीसीसीआई की बाडी को चला सकते हैं। मुझे नहीं लगता कि इस पद के लिए सौरव गांगुली से अच्छा कोई उम्मीदवार होगा।

सवाल : अपने 33 महीने के कार्यकाल को कैसे देखते हैं
जवाब : यह एक बहुत ही संतोषजनक अनुभव रहा है क्योंकि प्रमुख प्रशासन में अब चार पूर्व खिलाड़ी हैं। बीसीसीआई के अध्यक्ष के रूप में सौरव (गांगुली) हैं, आईपीएल के अध्यक्ष बृजेश पटेल, अंशुमान गायकवाड़ और शांता रंगास्वामी शीर्ष परिषद में हैं। हम प्लेयर्स की एसोसिएशन बनाने में सफल रहे। इसके अलावा वुमन आईपीएल शुरू करवाया गया। हमारी अब तक आई सभी मीटिंग के मिनट्स (स्टेट्स रिपोर्ट) आपको बेवसाइट पर मिल जाएगी। लोढ़ा समिति की सिफारिशों को भी लागू करवाया।

सवाल : आप पर आरोप है कि आपने फैसले लेने के लिए विराट कोहली और रवि शास्त्री के हाथ खोल दिए?
जवाब : हां, ऐसे आरोप लगते रहे हैं। अगर क्रिकेट के मामलों में मुख्य कोच और टीम के कप्तान को फ्री-हैंड दिया जाता है, तो इसमें गलत क्या है? मैं बहुत स्पष्ट था कि हम चयन प्रक्रिया और क्रिकेट के मामलों में हस्तक्षेप नहीं करेंगे।

सवाल : अनिल कुंबले को जिस तरह हटाया गया, उसपर क्या कहेंगे?
जवाब : मैं उस मुद्दे पर टिप्पणी नहीं करना चाहता। मैं अनिल कुंबले का बहुत सम्मान करता हूं, कोच और क्रिकेटर दोनों के रूप में।

सवाल : सीओए में पॉलीटिकल प्रैशर को कैसे झेला?
जवाब : यह (सीओए) कोई चुनौती नहीं थी। मेरा उनसे कोई संपर्क नहीं था। कोर्ट में इनका सिर्फ इंटरेक्शन था। जहां तक मेरी आलोचना करने और मुझे बदनाम करने की कोशिश का सवाल है, मुझे उन बातों की कोई परवाह नहीं है। कोई भी व्यक्ति जो सुधारों का विरोध कर रहा था, मेरा मानना है कि इसमें उसका निहित स्वार्थ था।

सवाल : कॉन्फिलेक्ट ऑफ इंट्रस्ट रूल के बारे में क्या कहेंगें?
जवाब : क्रिकेटरों का जीवन बहुत छोटा होता है। उन्होंने खेल में अनुभव एकत्र किया है और उन्हें आईपीएल टीमों के कमेंटेटर, मेंटर या कोच के रूप में प्रवेश से क्यों मना किया जाना चाहिए।

सवाल : बीसीसीआई के सीईओ राहुल जौहरी पर यौन उत्पीडऩ के आरोप पर क्या कहेंगे?
जवाब : मेरे पास जिम्मेदारी थी कि मैं पूरी ईमानदारी से जौहरी के मामले में फैसला करूं। यह साफ है कि जांच की प्रक्रिया साफ नहीं थाी। बीच में ही शिकायतकर्ता गायब हो गया। इससे हमें यह भी पता नहीं चल पाया कि हुआ क्या है।

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