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स्पोर्ट्स डेस्क: भारतीय फुटबॉल इस समय अपने सबसे मुश्किल दौर से गुजर रहा है। इंडियन सुपर लीग (ISL) के अनिश्चितकालीन निलंबन ने खेल की पूरी व्यवस्था को हिला कर रख दिया है। इसी बीच टीम इंडिया के दिग्गज खिलाड़ी सुनील छेत्री समेत कई सीनियर फुटबॉलरों ने FIFA से हस्तक्षेप की मांग करते हुए भारतीय फुटबॉल के भविष्य को लेकर गंभीर चिंता जाहिर की है।

ISL सस्पेंड होने से बढ़ी अनिश्चितता

2025–26 सीजन की अब तक शुरुआत नहीं हो सकी है, जिससे खिलाड़ियों, क्लबों और फैंस के बीच असमंजस की स्थिति बनी हुई है। लीग के ठप होने से न केवल घरेलू फुटबॉल प्रभावित हुआ है, बल्कि खिलाड़ियों के करियर और क्लबों की आर्थिक स्थिरता पर भी सवाल खड़े हो गए हैं।

खिलाड़ियों का सामूहिक और दुर्लभ बयान

शुक्रवार को सोशल मीडिया पर जारी एक संयुक्त वीडियो संदेश में सुनील छेत्री, गुरप्रीत सिंह संधू, संधेश झिंगन के साथ कई विदेशी ISL खिलाड़ियों ने मौजूदा हालात पर खुलकर बात की। खिलाड़ियों ने कहा कि भारतीय फुटबॉल इस वक्त ऐसे ठहराव में फंसा है, जहां आगे की राह साफ नजर नहीं आ रही।

‘स्थायी ठहराव’ की चेतावनी

गोलकीपर गुरप्रीत सिंह संधू ने कहा कि जनवरी का महीना चल रहा है और इस समय खिलाड़ी ISL में प्रतिस्पर्धी मैच खेलते हुए नजर आने चाहिए थे, लेकिन वे अनिश्चितता में जी रहे हैं। वहीं संधेश झिंगन ने कहा कि डर और मजबूरी के चलते खिलाड़ियों को वह बात कहनी पड़ रही है, जिसे पूरा फुटबॉल जगत पहले से जानता है। खिलाड़ियों ने चेताया कि यदि जल्द समाधान नहीं निकला, तो भारतीय फुटबॉल ‘स्थायी ठहराव’ की स्थिति में चला जाएगा।

FIFA से आखिरी उम्मीद

खिलाड़ियों ने अपने बयान में FIFA से सीधे हस्तक्षेप की अपील की। उन्होंने साफ किया कि यह कदम किसी राजनीतिक उद्देश्य से नहीं उठाया गया है। खिलाड़ियों का कहना है कि मौजूदा गवर्नेंस व्यवस्था अपनी जिम्मेदारियां निभाने में असफल हो रही है और भारतीय फुटबॉल मानवीय, खेल और आर्थिक संकट का सामना कर रहा है।

सुनील छेत्री का स्पष्ट संदेश

भारतीय फुटबॉल के पोस्टर बॉय सुनील छेत्री ने इस अपील का समापन करते हुए कहा कि खिलाड़ी, सपोर्ट स्टाफ, क्लब मालिक और प्रशंसक सभी स्पष्टता, सुरक्षा और सबसे अहम एक सुरक्षित भविष्य के हकदार हैं। उन्होंने स्थिर व्यवस्था और दीर्घकालिक सोच की जरूरत पर जोर दिया।

ISL निलंबन की असली वजह

ISL संकट की जड़ ऑल इंडिया फुटबॉल फेडरेशन (AIFF) और फुटबॉल स्पोर्ट्स डेवलपमेंट लिमिटेड (FSDL) के बीच मास्टर राइट्स एग्रीमेंट (MRA) के नवीनीकरण में फंसी हुई है। यह समझौता 8 दिसंबर को समाप्त हो गया था, जिसके बाद जुलाई से ही 2025–26 सीजन को रोक दिया गया। मामला अब सुप्रीम कोर्ट में है और एक कोर्ट-नियुक्त समिति इसकी निगरानी कर रही है। ISL के व्यावसायिक अधिकारों के लिए निकाला गया टेंडर भी किसी बोली के बिना ही समाप्त हो गया।

क्लबों की शर्ते और एशियाई मंच पर खतरा

ISL के 14 में से 13 क्लबों ने AIFF को बताया है कि वे देरी से शुरू होने वाले सीजन में खेलने को तैयार हैं, बशर्ते उनसे कोई भागीदारी शुल्क न लिया जाए और संचालन व आयोजन का खर्च फेडरेशन उठाए। हालांकि समय की कमी के कारण AFC चैंपियंस लीग 2 के लिए जरूरी 24 मैचों की अनिवार्यता पूरी करना अब लगभग असंभव हो गया है। इसी वजह से क्लबों ने एशियन फुटबॉल कन्फेडरेशन से एक बार की विशेष छूट देने की मांग की है।

निर्णायक मोड़ पर भारतीय फुटबॉल

मौजूदा हालात में भारतीय फुटबॉल एक ऐसे मोड़ पर खड़ा है, जहां जल्द लिए जाने वाले फैसले खेल के भविष्य की दिशा तय करेंगे। खिलाड़ियों की FIFA से अपील ने इस संकट को अंतरराष्ट्रीय मंच पर ला दिया है और अब सभी की निगाहें आने वाले कदमों पर टिकी हैं।