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नई दिल्ली : टोक्यो 2020 और पेरिस 2024 ओलंपिक्स में कांस्य पदक जीतने वाली भारतीय हॉकी टीम के सदस्य गुरजंत सिंह ने शुक्रवार को हॉकी इंडिया अवार्ड्स समारोह के दौरान अपने संन्यास की घोषणा की। 31 वर्षीय इस भारतीय हॉकी खिलाड़ी ने 2017 में अपने डेब्यू के बाद से 130 अंतरराष्ट्रीय मैचों में हिस्सा लिया और 33 गोल किए। 

26 जनवरी 1995 को अमृतसर के खैलारा में जन्मे गुरजंत सिंह जूनियर हॉकी रैंक में तेजी से आगे बढ़े और अपनी गति तथा तेज सूझ-बूझ से सबका ध्यान अपनी ओर खींचा। उन्होंने भारतीय हॉकी के सबसे यादगार पलों में से एक में अहम भूमिका निभाई। 2016 में लखनऊ में जूनियर एफआईएच विश्व कप की जीत। 

फाइनल में गोल करके भारत को स्वर्ण पदक दिलाने में मदद करने के बाद उन्होंने 2017 में अपना सीनियर अंतरराष्ट्रीय डेब्यू किया और भारतीय आक्रमण पंक्ति के मुख्य खिलाड़ी बन गए। गुरजंत सिंह की सबसे बड़ी उपलब्धियां ओलंपिक मंच पर आईं, जहां वे टोक्यो 2020 और पेरिस 2024, दोनों में कांस्य पदक जीतने वाली भारतीय टीमों का एक अहम हिस्सा थे। गुरजंत ने भारत को एशियाई खेल 2023 और 2017 एशिया कप में स्वर्ण पदक दिलाने में भी मदद की, साथ ही कई एशियाई चैंपियंस ट्रॉफी खिताब भी जीते। 

2021 में उन्हें देश के सर्वोच्च खेल सम्मानों में से एक अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया गया। आज यहां अपने संन्यास की घोषणा करते हुए गुरजंत सिंह ने कहा, 'मैंने अपनी हॉकी यात्रा की शुरुआत इस कमरे में बैठे सीनियर खिलाड़ियों को अपना आदर्श मानकर की थी और उनके साथ भारत के लिए खेलने का अपना सपना पूरा करना मेरे लिए एक ऐसी बात है जिसे मैं हमेशा संजोकर रखूंगा।' 

उन्होंने आगे कहा, 'भारतीय हॉकी के ऐतिहासिक पुनरुद्धार का हिस्सा बनकर और दो ओलंपिक पदक हासिल करके मुझे बेहद संतोष महसूस हो रहा है। मैं अंतरराष्ट्रीय मंच से एक बहुत ही खुश और गौरवान्वित व्यक्ति के रूप में विदा ले रहा हूं।'