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नई दिल्ली : महिला पहलवान साक्षी मलिक में एक बार फिर से छा जाने के लिए साक्षी मलिक खूब मेहनत कर रही है। साक्षी को पूरे वर्ष निराशाजनक नतीजों का सामना करना पड़ा। राष्ट्रमंडल खेलों में वह पहले ही दौर में बाहर हो गई लेकिन रेपेचेज के जरिए कांस्य पदक जीतने में सफल रही। रोहतक की इस पहलवान ने एशियाई चैम्पियनशिप में एक और कांस्य पदक अपने नाम किया लेकिन वह यासर दोगू अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में पदक दौर तक पहुंचने से पहले बाहर हो गईं।

i have lot of power according to my wait : Sakshi malik

एशियाई खेलों में यही खराब प्रदर्शन जारी रहा जिसमें साक्षी खाली हाथ लौटी और वह विश्व चैम्पियनशिप में भी निराशाजनक तरीके से बाहर हो गई। साक्षी ने कहा, ‘‘मैं अपनी सभी बाउट का विश्लेषण करती हूं, चाहे मैंने इन्हें जीता हो या इनमें हारी हूं। मैं अपनी गलतियों को देखती हूं कि मैंने अंक कहां गंवाया और इसे सुधारने की कोशिश करती हूं। मेरे वजन के अनुसार मेरे अंदर काफी ताकत है और कुश्ती में ताकत व तकनीक का अच्छा तालमेल होता है। आप सिर्फ एक चीज पर निर्भर नहीं कर सकते, आपके अंदर दोनों होनी चाहिए। 

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रियो ओलंपिक की कांस्य पदकधारी पहलवान ने इस साल अपनी ज्यादातर बाउट गंवा दी जिसमें वह अंतिम क्षणों में राष्ट्रमंडल और एशियाई खेलों से बाहर हुई थीं। साक्षी ने कहा- मैं इस बात पर ध्यान लगा रही हूं कि बाउट के अंत में किस तरह चीजों को शांत रखा जाए। अंत के कुछ सेकेंड बहुत अहम होते हैं। मैं अंत में मैच गंवा रही हूं। मुझे खुद का ध्यान इसी पर लगाना होगा। साक्षी को राष्ट्रीय महासंघ ने ग्रेड बी का अनुबंध प्रदान किया था, जिसे आज बदलकर ग्रेड ए कर दिया गया।

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