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ग्लासगो: भारत के स्टार भाला फेंक खिलाड़ी और ओलंपिक व विश्व चैंपियन नीरज चोपड़ा ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में रजत पदक जीतने के बाद स्वीकार किया कि वह अभी अपनी सर्वश्रेष्ठ फिटनेस से काफी दूर हैं। नीरज ने कहा कि चोट से वापसी के बाद वह धीरे-धीरे अपनी लय हासिल कर रहे हैं और आने वाली प्रतियोगिताओं में लगातार सुधार करना ही उनका लक्ष्य है।

नीरज ने शुक्रवार को पुरुषों की जैवलिन थ्रो स्पर्धा में 85.83 मीटर के सीजन बेस्ट थ्रो के साथ सिल्वर मेडल जीता। वहीं श्रीलंका के रुमेश थरंगा पथिरागे ने 89.75 मीटर का थ्रो कर गोल्ड मेडल अपने नाम किया। यह नीरज का कॉमनवेल्थ गेम्स में लगातार दूसरा पदक रहा।

'अभी 100 प्रतिशत फिट नहीं हूं'

मुकाबले के बाद नीरज ने कहा कि वह अभी पूरी तरह फिट नहीं हुए हैं। उन्होंने बताया कि जून में दोहा डायमंड लीग चोट के बाद उनकी पहली प्रतियोगिता थी और तब वह पूरी तैयारी के साथ नहीं उतरे थे। नीरज ने कहा, 'मैं यह नहीं कह सकता कि मेरी फिटनेस पहले जैसी हो गई है। मैं धीरे-धीरे उस स्तर तक पहुंच रहा हूं। दोहा मेरी वापसी का पहला टूर्नामेंट था और यहां मैं पहले से बेहतर था, लेकिन अभी भी अपनी लय हासिल करने की कोशिश कर रहा हूं।'

'100 प्रतिशत फिट हों तो लड़ने का जज्बा अलग होता है'

भारतीय स्टार ने कहा कि पूरी तरह फिट होने और चोट से वापसी के बाद खेलने में बड़ा अंतर होता है। उन्होंने बताया कि चोट के बाद हर कदम संभलकर उठाना पड़ता है। उन्होंने कहा, 'मुझे गोल्ड जीतने का दबाव नहीं था, लेकिन जब आप 100 प्रतिशत फिट होते हैं तो आपके अंदर अलग ही आत्मविश्वास और लड़ने का जज्बा होता है। चोट से वापसी के बाद आपको हर कदम सोच-समझकर रखना पड़ता है। आज भी मैं पूरी ताकत से थ्रो करना चाहता था, लेकिन परिस्थितियों को देखते हुए थोड़ा संयम रखना पड़ा।'

ग्लासगो की ठंड बनी चुनौती

नीरज ने माना कि ग्लासगो का ठंडा मौसम सभी खिलाड़ियों के लिए चुनौतीपूर्ण था। उन्होंने कहा कि जैवलिन उम्मीद के मुताबिक उड़ नहीं रही थी और वह गर्म मौसम में बेहतर प्रदर्शन करते हैं। उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा, 'आज मेरा सिर्फ एक ही थ्रो अच्छा रहा। बाकी प्रयास और बेहतर हो सकते थे, लेकिन जैवलिन सही तरीके से उड़ नहीं रही थी। मुझे ठंडे मौसम में प्रदर्शन करना पसंद नहीं है। मैं गर्म मौसम में बेहतर खेलता हूं... क्योंकि मेरी रगों में भारतीय खून है।'

रुमेश ने भी एक शानदार थ्रो से जीता गोल्ड

नीरज ने श्रीलंका के गोल्ड मेडलिस्ट रुमेश थरंगा पथिरागे की भी तारीफ की। उन्होंने कहा कि कई बार एक शानदार थ्रो ही मुकाबला जीतने के लिए काफी होता है। उन्होंने कहा, 'आज उनके पास भी एक शानदार थ्रो था और मेरे पास भी सिर्फ एक अच्छा प्रयास था। कई बार जीत के लिए एक बेहतरीन थ्रो ही काफी होता है।'

अब अगले टूर्नामेंट पर नजर

नीरज ने कहा कि उनका लक्ष्य अब हर प्रतियोगिता के साथ खुद को बेहतर बनाना है। उन्होंने माना कि इस सीजन में अभी काफी सुधार की गुंजाइश है। उन्होंने कहा, 'मैं नहीं कहूंगा कि इस सीजन में मैंने बहुत ज्यादा सुधार कर लिया है। मैं इससे बेहतर प्रदर्शन कर सकता था। अब मेरा पूरा फोकस आने वाले टूर्नामेंटों में लगातार सुधार करने पर रहेगा।'