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स्पोर्ट्स डेस्क (नीलकंठ): टीम इंडिया के पूर्व कप्तान सौरव गांगुली का आज 47 वां जन्मदिन है। इनका नाम क्रिकेट में सफल खिलाड़ियों में आता है। तभी इन्हें दादा नाम से पुकारा जाता है। अपने दौर में मैदान पर दादागिरी की वजह से अकसर सुर्खियों में रहते थे। गांगुली को पहली बार 1991-92 में ऑस्ट्रेलिया टूर पर गई टीम इंडिया में शामिल किया गया था। आइए, जानते हैं इसके करियर से जुड़ें खास बातें-  

2002 में फ्लिंटॉफ को उन्हीं की भाषा में दिया था जवाब 
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क्रिकेट फैंस को आज भी ट्राई सीरिज के फाइनल के दौरान सौरव द्वारा 2002 में इंग्लैंड के खिलाफ नेटवेस्‍ट ट्रॉफी जीतना का जश्न याद होगा। जब इन्होंने अपनी टी-शर्ट उतारकर लहराई थी। दरअसल, साल 2002 में इंग्लैंड के एंड्यू फ्लिंटॉफ ने इंडिया में वानखेड़े में जीत के बाद टी-शर्ट उतारकर दौड़ लगाई थी और गांगुली को नीचा दिखाने की कोशिश की थी, इसलिए जब दादा की टीम ने इंग्लैंड को उसी के घर में हराकर जीत दर्ज की तो उन्होंने फ्लिंटॉफ को उन्हीं की भाषा में जवाब दिया था। 

बतौर कप्तान ऐसा रहा सफर 
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सौरव गांगुली अपनी कप्तानी में टीम इंडिया को 20 से ज्यादा टेस्ट मैचों में जीत दिलाने वाले पहले कप्तान हैं। उनकी कप्तानी में भारत ने 21 टेस्ट जीते। उनका यह रिकॉर्ड टीम इंडिया के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने तोड़ा। 2000 से 2005 के बीच टीम इंडिया की कमान संभालने वाले गांगुली की अगुवाई में भारत ने 49 टेस्ट मैच खेले जिसमें से 21 में उसे जीत और 13 में हार का सामना करना पड़ा, जबकि 15 मैच ड्रॉ हुए। दादा की अगुवाई में 1999 से 2005 के बीच भारत ने 146 वनडे मैचों में 76 जीते और 65 गंवाए, जबकि 5 मैचों के नतीजे नहीं आए। 

जब टी-शर्ट उतारकर मनाया था जश्न 
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क्रिकेट फैंस को आज भी ट्राई सीरिज के फाइनल के दौरान सौरव द्वारा 2002 में इंग्लैंड के खिलाफ नेटवेस्‍ट ट्रॉफी जीतना का जश्न याद होगा। जब इन्होंने अपनी टी-शर्ट उतारकर लहराई थी। दरअसल, साल 2002 में इंग्लैंड के एंड्यू फ्लिंटॉफ ने इंडिया में वानखेड़े में जीत के बाद टी-शर्ट उतारकर दौड़ लगाई थी और गांगुली को नीचा दिखाने की कोशिश की थी, इसलिए जब दादा की टीम ने इंग्लैंड को उसी के घर में हराकर जीत दर्ज की तो उन्होंने फ्लिंटॉफ को उन्हीं की भाषा में जवाब दिया था।

हरभजन सिंह को टीम में शामिल करने को लेकर अड़ गए थे गांगुली
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साल 2001 में ऑस्ट्रेलिया दौरे के दौरान सौरव गांगुली हरभजन सिंह को टीम में शामिल करने के लिए अड़ गए, सिलेक्टर्स उन्हें टीम में नहीं रखना चाहते थे। उन्होंने सिलेक्टर्स से साफ कह दिया“जब तक हरभजन टीम में नहीं आएगा, मैं इस कमरे से बाहर नहीं जाऊंगा। आखिर में सिलेक्टर्स को इनकी जिंद के आगे झुकना पड़ा और इस सीरीज के दूसरे टेस्ट में हरभजन ने हैट्रिक ली और भारत ने फॉलोऑन के बावजूद ऐतिहासिक जीत दर्ज की थी। 

हासिल कर चुके हैं लगातार चार बार 'मैन आफ द मैच' का अवार्ड
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एक सबसे अनोखा रिकाॅर्ड जो अभी तक भी दादा के ही नाम है और वो है लगातार सबसे ज्यादा बार 'मैन ऑफ द मैच' अवाॅर्ड हासिल करने का। पाकिस्तान के खिलाफ 1997 को टोरेंटो में हुई वनडे सीरीज के दौरान दादा ने लगातार चार बार 'मैन ऑफ द मैच' अवार्ड अपने नाम किया था। उनके इस प्रदर्शन से उन्हें 'मैन ऑफ द सीरीज' अवार्ड भी मिला। गांगुली का यह रिकाॅर्ड अभी भी कोई नहीं तोड़ पाया।

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