नई दिल्ली : भारत के महान स्पिनर हरभजन सिंह ने कहा कि अगर लियोनेल मेसी ऐसा कर सकते हैं, तो विराट कोहली और रोहित शर्मा क्यों नहीं? उन्होंने इन अनुभवी खिलाड़ियों का समर्थन करते हुए कहा कि अगर उनमें खेलने का जज्बा और इच्छाशक्ति है, तो उन्हें अगले साल होने वाले वनडे वर्ल्ड कप में खेलना चाहिए।
इस 46 वर्षीय पूर्व ऑफ-स्पिनर ने रोहित और कोहली के भविष्य को लेकर चल रही कभी न खत्म होने वाली बहस पर अपनी राय रखी। यह बहस इस बात पर है कि 30 साल की उम्र पार कर चुके ये खिलाड़ी क्या सिर्फ एक फॉर्मेट के खिलाड़ी बनकर रह जाएंगे। PTI इंटरव्यू के दौरान हरभजन ने कहा, 'खिलाड़ी कोई भी हो, मेरा मानना है कि पैमाना प्रदर्शन होना चाहिए, उम्र नहीं।'

मेसी का उदाहरण
उन्होंने जोर देकर कहा कि वर्ल्ड कप में वैभव सूर्यवंशी जैसे रोमांचक लेकिन अपेक्षाकृत अनुभवहीन युवा खिलाड़ी की तुलना में कोहली और रोहित पर उम्मीदों का कहीं ज्यादा बोझ होगा। रोहित और कोहली ने अब तक जो दृढ़ संकल्प दिखाया है, उसे देखते हुए हरभजन ने कहा कि वे भी वही कारनामा कर सकते हैं जो हाल ही में फुटबॉल वर्ल्ड कप में 39 वर्षीय मेसी ने किया था। मेसी ने अपने शानदार व्यक्तिगत खेल के दम पर अर्जेंटीना को फाइनल तक पहुंचाया; जब भी वे गेंद लेकर आगे बढ़ते, विरोधी टीम का डिफेंस बिखर जाता था।
जब दक्षिण अफ्रीका, जिम्बाब्वे और नामीबिया में वनडे वर्ल्ड कप होगा, तब रोहित 40 साल के और कोहली 39 साल के होंगे। हरभजन ने तर्क दिया, 'विराट भले ही 39 साल के हों, लेकिन अगर वे मैदान पर 20 साल के युवाओं को पीछे छोड़ रहे हैं, तो उनकी उम्र कोई मायने नहीं रखती। लियोनेल मेसी को ही देख लीजिए। 40 (39) साल की उम्र में भी 5 खिलाड़ी उन्हें रोक नहीं पाते। अगर किसी खिलाड़ी में ऐसी फिटनेस और हुनर है कि 5 विरोधी खिलाड़ी भी उसे रोक नहीं सकते, तो हम जानते हैं कि हुनर हमेशा सबसे ऊपर होता है।'

कोहली ने जीत का भरोसा जगाया : हरभजन
हरभजन ने ड्रेसिंग रूम में जीत का भरोसा जगाने का श्रेय कोहली को दिया, क्योंकि वे लगातार खिलाड़ियों को बताते थे कि कोई भी लक्ष्य हासिल न कर पाने जैसा नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि फिटनेस के मामले में कोहली ने ही सीमाओं को आगे बढ़ाया और उन्हें एहसास दिलाया कि उनकी क्षमता उनकी सोच से कहीं ज्यादा है। पूर्व स्पिनर ने कहा, 'यह बदलाव सबसे पहले विराट कोहली लाए थे, जब वे 2014-15 में कप्तान बने थे। उससे पहले हम आखिरी दिन 400 रन का पीछा करने के बारे में सोचते भी नहीं थे। विराट ने खिलाड़ियों से कहा चलो कम से कम कोशिश तो करते हैं। हो सकता है हम हार जाएं, लेकिन अगर हम कोशिश करते रहे तो एक दिन हम आखिरी पारी में 400 से ज़्यादा रन बना लेंगे।'
उन्होंने याद करते हुए कहा, 'अगर हमें आखिरी दिन 10 विकेट लेने हों, तो हम उसके लिए पूरी कोशिश करेंगे। विराट कोहली ने टीम में जीतने की मानसिकता जगाई और ड्रॉ पर समझौता न करने का जज्बा पैदा किया। लेकिन उनका सबसे बड़ा योगदान फिटनेस कल्चर लाना था। फिटनेस क्रांति लाने का 90 प्रतिशत श्रेय कोहली को जाता है। मेरे लिए फिटनेस का मतलब सिर्फ स्टैमिना था, लेकिन विराट ने टीम को यकीन दिलाया कि अगर आप फिट हैं, तो आप मैदान पर कहीं भी तेजी से हरकत कर सकते हैं।'

गौतम गंभीर को सलाह
हरभजन की हेड कोच गौतम गंभीर को यही सलाह होगी कि वे इन दोनों के अनुभव पर भरोसा करें। उन्होंने समझाया, 'अगर मैं कोच होता, तो मेरा काम उन्हें मंच देना होता, क्योंकि रोहित और विराट से मेरी उम्मीदें वैभव सूर्यवंशी से कहीं ज्यादा होतीं। इन दोनों के पास अनुभव है। उनके पास 300 मैचों का अनुभव है जो सूर्यवंशी के पास नहीं होगा। हां, सूर्यवंशी आकर गेंदबाजों की धुनाई कर सकते हैं, लेकिन विराट और रोहित के पास अनुभव है। फिटनेस प्राथमिकता है और आपका प्रदर्शन मायने रखता है। प्रदर्शन ही सबसे जरूरी पैमाना है। इसलिए अगर ये दोनों रन बनाते हैं और श्रेयस (अय्यर) या यशस्वी (जैसवाल) जैसी फिटनेस बनाए रखते हैं, तो बाकी किसी चीज से कोई फर्क नहीं पड़ता।'
अपने शानदार करियर में 416 टेस्ट और 269 वनडे विकेट लेने वाले जालंधर के इस क्रिकेटर ने कहा कि खिलाड़ियों को आमतौर पर पता होता है कि उन्हें अपना करियर कब खत्म करना है। उन्होंने याद किया कि कैसे उनके शरीर ने उन्हें असल में औपचारिक घोषणा करने से छह साल पहले ही रुकने का संकेत दे दिया था। उन्होंने कहा, 'रोहित और विराट को इसका जवाब अपने अंदर से ही मिल जाएगा। आपको एहसास हो जाता है कि आप उस दौर में पहुंच गए हैं जब आपको रुकने का फैसला करना चाहिए।'

हरभजन ने संन्यास पर की बात
हरभजन ने आधिकारिक तौर पर दिसंबर 2021 में संन्यास लिया, लेकिन उन्होंने अपना आखिरी टेस्ट मैच 2015 में गॉल में खेला था, जहां दिनेश चंडीमल ने उनकी जमकर धुनाई की थी। इससे उन्हें एहसास हुआ कि शायद अब रेड-बॉल क्रिकेट को अलविदा कहने का समय आ गया है। उन्होंने कहा, 'आपको एहसास होता है कि जब आप उस पड़ाव पर पहुंच जाते हैं जहां बने रहने के लिए आपको पहले से ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है। आप 30-35 साल की उम्र में होते हैं और आपसे यह उम्मीद नहीं की जा सकती कि आप वैसा ही प्रदर्शन करेंगे जैसा 18 या 20 साल की उम्र में करते थे। उस पड़ाव पर, आपके नाम 400 टेस्ट विकेट होते हैं और आपसे उसी स्तर पर प्रदर्शन की उम्मीद की जाती है। कई खिलाड़ी खराब प्रदर्शन के दौर से उबर जाते हैं। लेकिन कुछ ऐसे भी होते हैं जिन्हें लगता है कि 'बस बहुत हो गया, अब इसे और आगे नहीं खींच सकता।'
उन्होंने कहा, 'अगर आपमें क्षमता है तो कोशिश करने में कोई बुराई नहीं है, लेकिन अगर ऐसा नहीं है, तो इंसान को अपने शरीर की बात सुननी चाहिए।' हरभजन ने माना कि रविचंद्रन अश्विन का एक दमदार और अच्छा प्रदर्शन करने वाले ऑफ-स्पिनर के तौर पर उभरना भी उस समय उनके लिए एक चुनौती बन गया था। पूर्व क्रिकेटर ने कहा, 'अश्विन पहले से ही अच्छा प्रदर्शन कर रहे थे... आपको इस सच्चाई को स्वीकार करना होगा कि यह खिलाड़ी (अश्विन) अच्छा कर रहा है। अगर मुझे अश्विन से आगे निकलना होता, तो मुझे सब कुछ नए सिरे से शुरू करना पड़ता और उतनी ही मेहनत करनी पड़ती जितनी मैंने 'उन शुरुआती 400 विकेटों की बात करें तो क्या मैं ऐसा कर पाता? मुझे अंदर से जवाब मिला कि मैं ऐसा नहीं कर सकता।'