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नई दिल्ली : दिल्ली उच्च न्यायालय के हॉकी इंडिया में ‘आजीवन सदस्य’ पद को अवैध घोषित किए जाने के बाद अनुभवी खेल प्रशासक नरिंदर बत्रा को बुधवार को भारतीय ओलिम्पिक संघ (आईओए) अध्यक्ष पद से हटा दिया गया जबकि इसके आधार पर ही उन्होंने 2017 में शीर्ष संस्था का चुनाव लड़ा और जीता था। आईओए के सीनियर उपाध्यक्ष अनिल खन्ना को कार्यवाहक प्रमुख बनाया गया है।

बत्रा ने आईओए पद का अपना नामांकन हॉकी इंडिया के (आजीवन सदस्य) प्रतिनिधि के तौर पर ही भरा था। दिल्ली उच्च न्यायालय ने बुधवार को उनके आजीवन सदस्य और आजीवन अध्यक्ष पद को ‘अवैध’ घोषित किया क्योंकि यह राष्ट्रीय खेल संहिता के अंतर्गत नहीं था और हॉकी इंडिया के रोजमर्रा के कामकाज की देखरेख के लिए तीन सदस्यीय प्रशासकों की समिति (आईओए) नियुक्त की। 

पूर्व भारतीय हॉकी खिलाड़ी और 1975 विश्व कप विजेता टीम के सदस्य असलम शेर खान की बत्रा की हॉकी इंडिया के आजीवन सदस्य के तौर पर नियुक्ति पर चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत यह फैसला सुनाया। न्यायमूर्ति नजमी वजीरी और न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा की पीठ ने अपने आदेश में कहा कि प्रतिवादी नंबर दो (हॉकी इंडिया) का प्रशासनिक ढांचा, आजीवन अध्यक्ष और आजीवन सदस्यों के कारण गलत और अवैध ढंग से गठित है।

उन्होंने कहा- भारत सरकार ऐसे राष्ट्रीय खेल महासंघ को मान्यता नहीं दे सकती जिसका संविधान खेल संहिता के अंतर्गत नहीं हो। राष्ट्रीय खेल महासंघ में आजीवन अध्यक्ष, आजीवन सदस्य के पद अवैध हैं और साथ ही प्रबंधन समिति में सीईओ का पद भी। इन पद को हटाया जाता है। उच्च न्यायालय के फैसले के कुछ घंटे बाद आईओए ने एक बयान जारी कर कहा कि खन्ना अब संस्था के कार्यवाहक प्रमुख होंगे। 

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