रायपुर : भारत की वेटलिफ्टिंग स्टार मीराबाई चानू ने बड़े अंतरराष्ट्रीय इवेंट्स के लिए वजन वर्गों को मैनेज करने की अपनी रणनीतिक अप्रोच का खुलासा किया है। उन्होंने बताया कि वह कॉमनवेल्थ गेम्स के लिए अपना वजन 48 किलोग्राम वर्ग में बनाए रखेंगी, लेकिन उसके तुरंत बाद उन्हें 49 किलोग्राम वर्ग में जाना होगा क्योंकि एशियन गेम्स दो महीने के अंदर ही होने वाले हैं।
एक दशक से भी ज्यादा समय से साइखोम मीराबाई चानू भारतीय वेटलिफ्टिंग का चेहरा रही हैं। इस दौरान उन्होंने कई शानदार मेडल जीते हैं जिनमें टोक्यो ओलंपिक्स का सिल्वर मेडल, तीन वर्ल्ड चैंपियनशिप मेडल और तीन कॉमनवेल्थ गेम्स में पोडियम फिनिश शामिल हैं। फिर भी मणिपुर की इस वेटलिफ्टर से एक उपलब्धि अभी भी दूर है और वो है एशियन गेम्स में मेडल जीतना।
मीराबाई ने पहली बार 19 साल की उम्र में इस महाद्वीपीय प्रतियोगिता में हिस्सा लिया था और 2014 के इंचियोन एशियन गेम्स में नौवें स्थान पर रहीं थीं। बाद में पीठ की चोट के कारण उन्हें 2018 के जकार्ता एशियन गेम्स से हटना पड़ा था, जिससे उनकी तैयारियों में रुकावट आई थी।
मेडल के सबसे करीब वह 2022 के हांगझोऊ एशियन गेम्स में पहुंची थीं, जहां कूल्हे की चोट ने उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया था जबकि वह पोडियम फिनिश हासिल करने के बेहद करीब थीं। इस झटके के कारण उन्हें लगभग 5 महीने तक खेल से दूर रहना पड़ा था। 31 साल की इस खिलाड़ी ने शानदार वापसी करते हुए 2024 के पेरिस समर ओलंपिक्स के लिए क्वालिफाई किया, जहां वह लगातार दूसरा ओलंपिक मेडल जीतने से बाल-बाल चूक गईं। तब से उनका पूरा ध्यान आखिरकार एशियन गेम्स में मेडल न जीत पाने के सूखे को खत्म करने पर लगा हुआ है।