Sports

नई दिल्ली : भारत के दिग्गज मिडिल-डिस्टेंस धावक जिन्सन जॉनसन ने प्रतिस्पर्धी एथलेटिक्स से संन्यास लेने की घोषणा कर दी है। बुधवार को किए गए इस ऐलान के साथ ही उनके करीब 15 साल लंबे शानदार करियर का समापन हो गया। जिन्सन भारतीय ट्रैक एंड फील्ड के उन चुनिंदा एथलीटों में शामिल रहे, जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश का नाम रोशन किया।

ओलंपिक तक पहुंचने वाला ऐतिहासिक सफर

जिन्सन जॉनसन ने रियो ओलंपिक 2016 में 800 मीटर स्पर्धा में भारत का प्रतिनिधित्व किया था। इसके साथ ही वह 1980 में श्रीराम सिंह के बाद 800 मीटर में ओलंपिक के लिए क्वालीफाई करने वाले पहले भारतीय पुरुष धावक बने। यह उपलब्धि भारतीय एथलेटिक्स के इतिहास में मील का पत्थर मानी जाती है।

1500 मीटर में राष्ट्रीय रिकॉर्ड

अपने करियर के दौरान जिन्सन ने 1500 मीटर में राष्ट्रीय रिकॉर्ड भी अपने नाम किया। उन्होंने 2019 में ISTAF बर्लिन मीट में 3:35.24 मिनट का समय निकालते हुए यह रिकॉर्ड बनाया, जो उनके करियर की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक रहा।

एशियन गेम्स में पदकों की झड़ी

34 वर्षीय जिन्सन जॉनसन तीन बार एशियन गेम्स के पदक विजेता रहे हैं। स्वर्ण पदक: 1500 मीटर (जकार्ता 2018), रजत पदक: 800 मीटर (जकार्ता 2018), कांस्य पदक: 1500 मीटर (हांगझोउ 2023). इसके अलावा उन्होंने एशियन एथलेटिक्स चैंपियनशिप में भी भारत के लिए शानदार प्रदर्शन किया, जहां 2015 में रजत और 2017 में कांस्य पदक जीता।

800 मीटर में ऐतिहासिक रिकॉर्ड

2018 में जिन्सन ने 800 मीटर में 1:45.65 मिनट का समय निकालकर श्रीराम सिंह का 42 साल पुराना राष्ट्रीय रिकॉर्ड तोड़ा था। हालांकि, यह रिकॉर्ड बाद में 2025 में मोहम्मद अफसल ने तोड़ दिया।

भावुक सोशल मीडिया पोस्ट

संन्यास की घोषणा करते हुए जिन्सन जॉनसन ने सोशल मीडिया पर एक भावुक संदेश साझा किया। उन्होंने लिखा, 'कोलकाता से सपनों के साथ शुरू हुआ एक सफर, जो हांगझोउ एशियन गेम्स के पोडियम तक पहुंचा। कुछ यात्राएं मीटर और सेकेंड में नहीं, बल्कि आंसुओं, बलिदान, विश्वास और उन लोगों में मापी जाती हैं, जिन्होंने कभी गिरने नहीं दिया।'

उन्होंने आगे कहा, 'ओलंपिक, वर्ल्ड एथलेटिक्स चैंपियनशिप, एशियन गेम्स और कॉमनवेल्थ गेम्स में देश का प्रतिनिधित्व करना मेरे लिए सौभाग्य की बात रही। जब भी मैंने तिरंगा पहना, मैं सिर्फ पैरों से नहीं, दिल से दौड़ा।'

संन्यास लेकिन एथलेटिक्स से नाता कायम

जिन्सन ने अपने संदेश में यह भी साफ किया कि भले ही वह अब प्रतिस्पर्धी दौड़ से दूर हो रहे हैं, लेकिन एथलेटिक्स हमेशा उनके दिल में जिंदा रहेगा। 'ट्रैक ने मुझे अनुशासन, धैर्य और सम्मान सिखाया। मैं दौड़ से संन्यास ले रहा हूं, लेकिन एथलेटिक्स हमेशा मेरे साथ रहेगा। धन्यवाद भारत, मुझ पर भरोसा करने के लिए धन्यवाद।' भारतीय एथलेटिक्स को जिन्सन जॉनसन का योगदान लंबे समय तक याद रखा जाएगा।
 

NO Such Result Found