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स्विट्जरलैंड: निलंबित भारतीय मुक्केबाजी महासंघ (आईबीएफ) में वर्तमान गतिरोध से नाराज अंतर्राष्ट्रीय मुक्केबाजी संघ (आइबा) ने अब आईबीएफ को पूरी तरह से बाहर का रास्ता दिखा दिया है। उसने कहा कि आईबीएफ के वर्तमान पदाधिकारियों ने खेल की ‘छवि, ख्याति और हितों’ को नुकसान पहुंचाया। आइबा ने कड़े शब्दों वाले बयान में कहा कि विभिन्न हितधारकों से परस्पर विरोधी टिप्पणियां मिलने के बाद वह भारत के मसले से कैसे निबटा जाए इसको लेकर ‘उचित’ फैसला करने की स्थिति में नहीं था।

आईबीएफ को बर्खास्त करने से मुक्केबाजों और प्रशिक्षकों पर हालांकि असर नहीं पड़ेगा और वे मामला सुलझने तक आइबा के ध्वज तले अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भाग ले सकते हैं। विश्व संस्था ने अपने बयान में कहा, ‘‘अंतर्राष्ट्रीय मुक्केबाजी संघ (आइबा) की कार्यकारी समिति ने भारत में मुक्केबाजों से जुड़े सभी मसलों के व्यापक मूल्यांकन और आकलन के बाद बड़े खेद के साथ अपने वर्तमान निलंबित सदस्य भारतीय मुक्केबाजी महासंघ के साथ आधिकारिक रिश्ते समाप्त करने का फैसला किया है।’’

आइबा अध्यक्ष चिंग कुवो वु ने कहा कि नए चुनावों और नए अधिकारियों के पदभार ग्रहण करने तक आईबीएफ को मान्यता मिलने की संभावना नहीं है। वु ने कहा, ‘‘आइबा अध्यक्ष और पूरे मुक्केबाजी परिवार की तरफ से मुझे बहुत खेद और दुख है कि हमें यह फैसला करना पड़ा।’’ चौटाला विरोधी गुट के साथ आईबीएफ की 35 में से 20 से अधिक ईकाइयां हैं। चौटाला के करीबी रिश्तेदार मटोरिया को 2012 में हुए चुनाव में अध्यक्ष बनाया गया था।

चौटाला विरोधी गुट ने पश्चिम बंगाल ईकाई के प्रमुख असित बनर्जी की अध्यक्षता में एक समिति बनाई है जो एआईबीए से पत्राचार कर रही है। इसकी अंतिम बैठक गुवाहाटी में 23 फरवरी को हुई थी। एक अधिकारी ने कहा, ‘‘हम जल्दी ही एआईबीए को पत्र लिखकर संविधान में संशोधन के लिए बैठक बुलाने की अनुमति मांगेंगे ताकि संविधान को एआईबीए नियमों के अनुरूप बनाया जा सके। इसके अलावा नए सिरे से चुनाव की तारीख भी तय की जाएगी।’’