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नई दिल्ली: ऑस्ट्रेलियाई हॉकी टीम के सर्वप्रतिष्ठित एवं पांच बार वर्ष के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी का सम्मान प्राप्त कर चुके जेमी डॉयर का मानना है कि भारतीय हॉकी टीम विश्व की शीर्ष टीमों की अपेक्षा पर्याप्त क्षमतावान नहीं है। आठ बार की ओलम्पिक चैम्पियन रह चुकी तथा अपने पुराने गौरव को पाने के लिए संघर्षरत भारतीय टीम के बारे में डॉयर ने कहा कि भारतीय खिलाड़ी यूं ही मैदान में उतरकर रोज जीतने की उम्मीद नहीं कर सकते।

हीरो हॉकी इंडिया लीग (एचएचआईएल) में पंजाब वॉरियर्स और दिल्ली वेवरायडर्स के बीच शुक्रवार को होने वाले मुकाबले से पहले गुरुवार को डॉयर ने बताया, ‘‘ऐसा नहीं हो सकता कि आप मैदान पर उतरें और जीत जाएं। इसके लिए आपको खेल की रणनीति बनानी पड़ती है, खुद को स्वस्थ और चुस्त-दुरुस्त रखना पड़ता है, तथा खेल की अंतिम सीटी बजने तक फुर्तीला रहना पड़ता है। ये ऐसी कुछ बातें हैं जो भारतीय टीम खेल के वक्त नहीं करती।’’

पंजाब वॉरियर्स का नेतृत्व संभाल रहे 34 वर्षीय डॉयर ने जोर देकर कहा कि भारत को खेल के मूलभूत सिद्धांतों पर ध्यान केंद्रित करना होगा। डॉयर ने आश्चर्य व्यक्त करते हुए कहा कि भारतीय खिलाड़ी ट्रैपिंग और पासिंग जैसी सामान्य बातों पर ध्यान ही नहीं देते। उन्होंने आगे कहा, ‘‘हॉकी में सफलता पाने के लिए आपको कुछ आकर्षक करने की जरूरत नहीं होती। मैंने देखा कि भारतीय खिलाड़ी किस तरह अभ्यास करते हैं। वे ट्रैपिंग और पासिंग पर ज्यादा ध्यान ही नहीं देते। जर्मनी, ऑस्ट्रेलिया और नीदरलैंड्स जैसी विश्व की शीर्ष टीमें खेल की मूलभूत कौशलों में बहुत मजबूत हैं।’’

भारतीय खिलाडिय़ों में ऑस्ट्रेलियाई कोच के प्रति झुकाव पर डॉयर ने मजाकिया लहजे में कहा कि ऐसा लगता है कि वे इसके प्रति बेहद आकर्षित हैं। हाल ही में भारतीय हॉकी टीम के ऑस्ट्रेलियाई कोच माइकल नॉब्स को हटाकर ऑस्ट्रेलिया के ही टेरी वॉल्श को नया कोच नियुक्त किया गया है। डॉयर ने कहा, ‘‘गंभीरता से कहूं तो टेरी बहुत अच्छे कोच हैं, तथा मुझे उम्मीद है कि उनके मार्गदर्शन में भारतीय टीम खेल की उपयुक्त प्रणाली सीख पाएगी। उन्हें किसी अन्य चीज की अपेक्षा मानसिक तौर पर सुदृढ़ होने की जरूरत है।’’