Sports

नई दिल्ली: कभी भारतीय क्रिकेट टीम की ‘रीढ़’ माने जाने वाले विस्फोटक बल्लेबाज वीरेंद्र सहवाग वर्तमान में राष्ट्रीय टीम में वापसी के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रहे हैं। ऐसे में इसे जहां वीरू के अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट के अध्याय का अंत माना जा रहा है वहीं क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि पिक्चर अभी बाकी है।  पिछले एक वर्ष से राष्ट्रीय टीम से बाहर चल रहे सहवाग लंबे समय से खराब फार्म से जूझ रहे हैं। वर्ष 2013-14 के रणजी सत्र में सहवाग का सर्वाधिक स्कोर 59 रनों की पारी रही है जबकि प्रथम श्रेणी क्रिकेट में उन्होंने हुबली में वैस्टइंडीज-ए के खिलाफ सर्वाधिक 38 रन बनाए थे। भारत के पूर्व अनुकूलन कोच पैडी अप्टन ने कहा कि इसका समाधान सिर्फ सहवाग के हाथों में है। अप्टन पूर्व भारतीय कोच गैरी कस्र्टन की कोचिंग टीम का हिस्सा थे जिसने टीम को वर्ष 2010 में नंबर वन टैस्ट टीम तक पहुंचाया था।

अप्टन ने कहा, ‘‘मुझे लगता है कि सहवाग के अध्याय का अंत नहीं हुआ है। सहवाग के पास अनुभव है जो उन्हें अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में वापस ला सकता है। यह उन पर है कि वह अपने प्रतिद्वंद्वी और चयनकत्र्ताओं के निर्णय से कैसे ऊपर उठते हैं।’’ पूर्व भारतीय कप्तान और चयनकत्र्ता दिलीप वेंगसरकर ने कहा, ‘‘सहवाग इस समय अनुभव और आत्मविश्वास दोनों खो चुके हैं। वह अंतर्राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी हैं और उनका घरेलू क्रिकेट में रन स्कोर नहीं करना मेरे लिए बहुत ही चौंकाने वाला है।’’

पूर्व  टैस्ट ओपनर चेतन चौहान ने कहा, ‘‘सहवाग इस समय फार्म में नहीं हैं और वह बहुत तेजी से रन बनाना चाहते हैं लेकिन उन्हें इस समय धीमी गति से खेलने की जरूरत है और धीरे-धीरे फार्म में लौटने का प्रयास करना चाहिए।’’