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नई दिल्ली : विश्व मुक्केबाजी चैम्पियनशिप के दौरान अकेली भारतीय सुपरस्टार एमसी मैरीकाम ही नहीं बल्कि चार अन्य देशों से भी ऐसी प्रतिभागी भाग ले रही हैं जोकि बॉक्सिंग के साथ-साथ अपनी मां होने का फर्ज भी निभाती हैं। मैग्नीफिसेंट मैरी हालांकि इन सभी में एकमात्र ऐसी मुक्केबाज हैं जो पांच बार विश्व चैम्पियन बनने का गौरव हासिल कर चुकी हैं और छठी बार यह कारनामा करने की कोशिश में जुटी हैं। लंदन ओलंपिक की यह कांस्य पदकधारी कई मुक्केबाजों के लिए प्रेरणास्रोत भी है और पैंतीस साल की उम्र में उनका फिटनेस का स्तर शानदार है। पेश है- विश्व मुक्केबाजी में हिस्सा ले रही मांओं पर रिपोर्ट-

मैरी कॉम : 35 साल की मैरी विश्व मुक्केबाजी की सबसे सफल एथलीट में से एक है। मेरी ने 2005 में फुटबॉलर करंग ओन्कोहोलर ऑनलर से शादी की थी। उनके तीन बच्चे हैं। उनके तीसरे बेटे प्रिंस ने 2013 में जन्म लिया था। इसके बावजूद मैरी दोबारा रिंग में लौटी और कई महत्वपूर्ण मुकाबले अपने देश के लिए जीते।

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मीरा : फिनलैंड की मीरा पोटकोनेन ने 2016 रियो ओलंपिक खेलों में कांस्य पदक अपने नाम किया था और अस्ताना में हुई पिछली एआईबीए महिला विश्व चैम्पियनशिप में भी वह तीसरे स्थान पर रही थी। गत यूरोपीय चैम्पियन मीरा की दो बेटिया हैं और उनकी अनुपस्थिति में उनकी देखभाल उनके पति करते हैं। मीरा का कहना है कि जब मैं टूर्नामेंट के लिए बाहर होती हूं तो मेरी दोनों बेटियों की देखभाल मेरे पति करते हैं। मीरा ने दूसरी बेटी के जन्म के बाद मोटापे को कम करने के लिए मुक्केबाजी शुरू की थी लेकिन धीरे-धीरे यह खेल उनका जुनून बनता गया। उन्होंने कहा- मां बनने से मेरा मुक्केबाजी करियर प्रभावित नहीं हुआ। जब बेटियां छोटी थीं, तब थोड़ी मुश्किल आती थी लेकिन उनके बड़े होने के बाद घर और मुक्केबाजी के बीच अच्छा संतुलन बन गया है।

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रासमुसेन : डेनमार्क की रासमुसेन 64 किग्रा लाइट वेल्टरवेट में खेलती हैं, उन्होंने 2005 में अपना पहला अंतरराष्ट्रीय पदक जीता था। वह अपने बच्चों का स्कूल का काम करवाती हैं, दिन में दो बार ट्रेङ्क्षनग करती हैं और साथ ही अपने पारिवारिक कृषि व्यवसाय में हाथ बंटाती हें। मुक्केबाजी के लिये खुद को फिट रखने के लिए हर दिन अपने मुक्केबाजी क्लब के लिए डेढ़ घंटे ड्राइविंग करती हैं।

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इनग्रिट वालेंसिया : कोलंबिया की रियो ओलंपिक की कांस्य पदकधारी इनग्रिट वालेंसिया ने 2006 में अपने बेटे के जन्म के बाद दो साल के लिये ट्रेङ्क्षनग छोड़ दी थी लेकिन वापसी के बाद उन्होंने ओलंपिक में कांसे के अलावा इस साल दक्षिण अमेरिकी खेलों और अमेरिकी एंड कैरेबियन खेलों में भी जीत हासिल की। तीस साल की यह मुक्केबाज लाईवेट 51 किग्रा में खेलती है।

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जोसी गाबुको : फिलीपींस की 31 साल की मुक्केबाज जोसी गाबुको ने 2012 विश्व चैम्पियनशिप में स्वर्ण पदक जीता था और यह उनके देश के इस प्रतियोगिता में इतिहास में एकमात्र स्वर्ण पदक है। उनका 11 साल का बेटा है जिसने एक साक्षात्कार में कहा था, ‘‘प्लीज मेरी मां को मत मारना।

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