Sports

नई दिल्ली : अपने बचपन के कोच रमाकांत आचरेकर को भावभीनी श्रृद्धांजलि देते हुए चैम्पियन क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर ने कहा- आचरेकर सर की मौजूदगी से स्वर्ग में भी क्रिकेट धन्य हो गया होगा। आचरेकर का 87 वर्ष की उम्र में बढ़ती उम्र से जुड़ी बीमारियों के कारण आज मुंबई में निधन हो गया। उनके सबसे काबिल शिष्य ने एक बयान में कहा- उनके कई छात्रों की तरह मैने भी क्रिकेट का ककहरा सर के मार्गदर्शन में सीखा। सचिन ने कहा- मेरी जिंदगी में उनके योगदान को शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता। उन्होंने वह नींव बनाई जिस पर मैं खड़ा हूं। आधुनिक क्रिकेट के महानतम बल्लेबाज तेंदुलकर को आचरेकर सर मुंबई के शिवाजी पार्क में कोङ्क्षचग देते थे। आचरेकर ने खुद एक ही प्रथम श्रेणी मैच खेला लेकिन तेंदुलकर के कैरियर को संवारने में उनका बड़ा योगदान रहा। वह अपने स्कूटर से उसे स्टेडियम लेकर जाते थे।

sachin-tendulkar-coach-ramakant-achrekar-died

 तेंदुलकर ने कहा- पिछले महीने मैं सर से उनके कुछ छात्रों के साथ मिला और हमने कुछ समय साथ बिताया। हमने पुराने दौर को याद करके काफी ठहाके लगाए। उन्होंने कहा- आचरेकर सर ने हमें सीधा खेलने और जीने का महत्व बताया। हमें अपनी जिंदगी का हिस्सा बनाने और अपने अनुभव को हमारे साथ बांटने के लिए धन्यवाद सर। उन्होंने आगे लिखा- वेल प्लेड सर। आप जहां भी हैं, वहां और सिखाते रहें। सचिन ने कहा, ‘‘सर ने मेरे जीवन की आधारशिला रखी और आज मैं जो भी हूं उन्हीं की बदौलत हूं। पिछले महीने ही मैं सर से उनके कुछ शिष्यों के साथ मिला था और उनके साथ समय गुजारा था। हमने पुराने समय को याद करते हुए बेहतरीन समय बिताया था। आचरेकर सर ने हमें क्रिकेट में हमेशा सीधे खेलने और जीवन में सीधे रहने के आदर्श सिखाये थे। मेरा जीवन बनाने के लिए मैं सदैव आपका ऋणी रहूंगा। बहुत बढिय़ा खेले सर और आप जहां भी रहें, आप और शिष्य तैयार करें। 

sachin-tendulkar-coach-ramakant-achrekar-died

पूर्व भारतीय क्रिकेटर वीवीएस लक्ष्मण और मोहम्मद कैफ ने आचरेकर को श्रद्धांजलि देते हुए कहा- देश उनका क्रिकेट में योगदान कभी भुला नहीं पाएगा क्योंकि उन्होंने देश को सचिन जैसा हीरा दिया। आचरेकर को अपने सभी शिष्यों में सचिन से खास लगाव था। खुद सचिन ने भी अपने गुरु को न केवल अपनी उपलब्धियों से गौरवान्वित किया बल्कि उन्हें जब भी मौका मिलता था वह अपने गुरु के प्रति अपना स्नेह और आदर प्रकट करने उनके पास जाते रहते थे। आचरेकर के जन्मदिन और टीचर्स डे पर सचिन हमेशा उनके पैर छूकर आशीर्वाद लेते थे। राज

.
.
.
.
.