Sports

राजकोटः अपने डेब्यू टेस्ट में पृथ्वी शाॅ ने शतकीय पारी खेलकर सबका ध्यान अपनी ओर खींच लिया। पृथ्वी ने विंडीज के खिलाफ पहली पारी में 134 रन बनाए आैर इसी के साथ वह डेब्यू टेस्ट में शतक जड़ने वाले पहले युवा भारतीय क्रिकेटर बन गए हैं। मैच का पहला दिन समाप्त होने के बाद पृथ्वी ने प्रेस क्रांफ्रेंस में बड़ी पारी खेलने का राज बताया। 
PunjabKesari

इस युवा बल्लेबाज ने कहा, ''मेरा उसूल साफ है कि गेंद को उसकी मेरिट पर खेलो, फिर चाहे प्रथम श्रेणी क्रिकेट हो यह टेस्ट मैच। मैं जैसे हर मैच में खेलता आया हूं उसी तरह आज भी खेला। मैंने कुछ नया या अतिरिक्त करने की कोशिश नहीं की।'' पृथ्वी ने साथ ही कहा, ''इंग्लैंड में सीनियर खिलाडिय़ों के साथ ड्रेसिंग रूम साझा करने का अनुभव उनके काम आया। इंग्लैंड में सभी सीनियर खिलाडिय़ों, कप्तान विराट कोहली और कोच रवि सर ने बराबर मेरा हौसला बढ़ाया और मुझे सहज किया। अब तो मुझे लगता है कि सभी मेरे दोस्त की तरह हैं।'' 
PunjabKesari

उन्होंने कहा, ''शुरू में मैं कुछ नर्वस था क्योंकि यह मेरा पहला टेस्ट था लेकिन 5-10 ओवर खेलने के बाद मेरे अंदर आत्मविश्वास आने लगा। बल्ले से बॉउंड्री आ रही थीं और मुझे कुछ ढीली गेंदें खेलने को मिल रही थीं जिससे मुझे अपने शॉट खेलने में आसानी हुई। जो अच्छी गेंदें थीं मैंने उन्हें उनकी योग्यता के आधार पर खेला।'' अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट को एक अलग अनुभव बताते हुए पृथ्वी ने कहा, ''अंडर-19, घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में काफी फर्क है। घरेलू क्रिकेट में आप अपने ही साथी खिलाडिय़ों के साथ खेलते हैं लेकिन अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में गेंदबाजों में गति होती है, उनके पास अनुभव होता है और उन्हें खेलना आसान नहीं होता है।'' 

जहां भी माैका मिले खेलने को हैं तैयार
PunjabKesari
ओपनिंग में उतरने के बारे में पूछे जाने पर युवा खिलाडी ने कहा, ''यह फैसला कप्तान और कोच को करना था कि मुझे कहां खेलना है। वैसे मुझे जहां भी कहा जाता मैं वहीं खेलने के लिए भी तैयार था। मुझे ओपनिंग में जगह दी गई और मैंने इस मौके का पूरा फायदा उठाया। मेरे दिमाग में सिर्फ एक ही बात थी कि स्कोरबोर्ड को आगे बढ़ाये रखना है और मैंने वही किया।'' पृथ्वी ने इस शतक का श्रेय अपने पिता को देते हुए कहा, ''मैं इसका श्रेय उन्हें देना चाहूंगा क्योंकि उन्होंने मेरे लिए बड़ा त्याग किया है और आज मैं यहां उन्ही की वजह से हूं।''

.
.
.
.
.