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जालन्धर : कॉमनवैल्थ गेम्स की पैरा एथलीट कैटेगरी में भारत की ओर से पावरलिफ्टिंग में पहला मैडल जीतने वाले सचिन चौधरी ने बताया है कि किस तरह एक मंत्री के मजाक ने उन्हें लक्ष्य प्रति आश्वस्त रहने के लिए प्रेरित किया। मेरठ के रहने वाले 35 साल के सचिन चौधरी ने बताया कि उन्होंने जिंदगी में काफी देर तक बुरा दौर देखा। 2014 में डोपिंग के कारण सचिन पर प्रतिबंध लगा दिया गया था। इसके बावजूद उन्होंने वापसी की। कई नामी टूर्नामैंट में बढिय़ा प्रदर्शन कर कॉमनवैल्थ के लिए अपना टिकट कटाया।
अपने दिल के पर्दे खोलते हुए सचिन ने बताया कि कैसे एक मंत्री ने उनका बनाया था। हुआ यह था कि सचिन पावरलिफ्टिंग में थोड़ा नाम कमाने के बाद सरकारी नौकरी के लिए दर दर भटक रहे थे। इसी दौरान एक मंत्री से उनकी मुलाकात हुई। मंत्री को अपनी उपलब्धियों का हवाला दिया। मंत्री ने प्रोत्साहन देने की बजाय मजाक उड़ाना शुरू कर दिया। कहा- अगर तू इतना क्यों खेल लिया कि तुझे नौकरी ही नहीं मिल पाई। मंत्री की कही बतों सचिन के दिल में घर कर गई थी। 
सचिन ने इस बातचीत को मोबाइल पर रिकॉर्ड कर लिया था। प्रैक्टिस से पहले हर रोज वह इस रिकॉर्डिंग को सुनता था। इसी से उसे कड़ी मेहनत करने की प्रेरणा मिली। कॉमनवैल्थ में मैडल जीतने पर उन्होंने कहा- यह उनके लिए उपलब्धि है। लेकिन यह मैडल और भी बड़ा हो सकता था अगर उनकी दो लिफ्ट को फेल घोषित न किया गया होता।

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