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नई दिल्ली : पाकिस्तान के पूर्व कप्तान मोहम्मद यूसुफ ने इंग्लैंड के मौजूदा टेस्ट दौरे के दौरान किए गए बड़े बदलावों पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि यह कदम प्रदर्शन के आधार पर नहीं, बल्कि "अंदरूनी उथल-पुथल और मतभेदों के पुराने दौर" को दर्शाता है। पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) ने इंग्लैंड के खिलाफ तीन मैचों की टेस्ट सीरीज में टीम के 0-2 से पिछड़ने के बाद बड़ा बदलाव किया। बोर्ड ने तीसरे टेस्ट से पहले सात खिलाड़ियों और कोचिंग स्टाफ के दो सदस्यों को घर वापस भेज दिया। 

इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए यूसुफ ने कहा कि खिलाड़ियों और कोचिंग स्टाफ को वापस बुलाने का फैसला सिर्फ प्रदर्शन से जुड़ा नहीं लगता। यूसुफ ने सोशल मीडिया पर लिखा, 'अधिकारियों का मौजूदा दौरे से खिलाड़ियों और कोचिंग स्टाफ को वापस बुलाने का हालिया फैसला सिर्फ प्रदर्शन से जुड़ा नहीं लगता।' उन्होंने आगे कहा, 'आखिरकार, हम जहीर अब्बास, जावेद मियांदाद, इंजमाम-उल-हक या सईद अनवर जैसे दिग्गजों को उनकी जगह नहीं भेज रहे हैं। इसके बजाय, यह कदम अंदरूनी उथल-पुथल, मतभेदों और विवादों के उस पुराने दौर को दर्शाता है जिसने लंबे समय से पाकिस्तान क्रिकेट को परेशान किया है।' 

पाकिस्तान के लिए 90 टेस्ट खेले और 7,500 से ज्यादा रन बनाने वाले यूसुफ ने कहा कि 1992 में टीम की ऐतिहासिक वर्ल्ड कप जीत के बाद से ही अस्थिरता बार-बार लौटती रही है। उन्होंने कहा, '1992 वर्ल्ड कप की शानदार जीत के बाद से ही ऐसी उथल-पुथल बार-बार सामने आई है, जिससे स्थिरता खत्म हुई है और ध्यान खेल से भटका है।' उनकी यह टिप्पणी तब आई जब PCB ने लॉर्ड्स में इंग्लैंड से 194 रन से हारने के बाद मोहम्मद रिजवान, इमाम-उल-हक, सलमान अली आगा, अली उस्मान, आमिर जमाल, मुहम्मद अवैस जफर और खुर्रम शहजाद को टेस्ट टीम से बाहर कर दिया। पाकिस्तान को हेडिंग्ले में खेले गए पहले टेस्ट में भी एक पारी और 103 रन से हार का सामना करना पड़ा था। 

बोर्ड ने रेड-बॉल हेड कोच सरफराज अहमद और बॉलिंग कोच उमर गुल को भी हटा दिया है। अब दौरे के बाकी हिस्से के लिए व्हाइट-बॉल हेड कोच माइक हेसन और एशले नोफके बैक-रूम की जिम्मेदारियां संभालेंगे। पूर्व कप्तान ने चेतावनी दी कि मैदान के बाहर लगातार चल रही उथल-पुथल से टीम की तरक्की और समर्थकों का भरोसा और कमजोर हो सकता है। उन्होंने लिखा, 'हमने पहले भी कई बार अलग-अलग तरह की उथल-पुथल का सामना किया है; हर बार ऐसी घटनाओं ने टीम की तरक्की और प्रशंसकों के भरोसे पर बुरा असर डाला है।' 

उन्होंने कहा, 'सबक साफ है! सिर्फ शानदार प्रदर्शन और लगातार अच्छे नतीजों से ही इन बातों को शांत किया जा सकता है। अगर पाकिस्तान क्रिकेट को अपनी साख वापस पानी है और प्रशंसकों का भरोसा जीतना है, तो उसे बोर्डरूम के बजाय मैदान पर ध्यान देना होगा। सफलता ही सबसे कारगर उपाय है।'