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गोल्ड कोस्ट : राष्ट्रमंडल खेलों में मानसिक दबाव, हल्की चोट और बेमतलब के विवाद से जूझने वाली साइना नेहवाल अब जबकि महिला एकल की चैम्पियन हैं तब वह अपने इस स्वर्ण पदक को 2012 के ओलम्पिक कांस्य पदक से थोड़ा ही कम करके आंकती हैं। साइना ने शीर्ष वरीयता प्राप्त हमवतन पी वी सिंधू को एकल फाइनल में हराने के बाद कहा- मैं वास्तव में इसे अपने ओलम्पिक पदक और विश्व में नंबर एक रैंकिंग के बाद सबसे महत्वपूर्ण मानती हूं। इसलिए मैं इसे वहीं कहीं स्थान दूंगी। यह मेरे पिता, मेरी मां और मेरे देश के लिए तोहफा है। चोट के कारण रियो ओलंपिक में निराशाजनक हार के बाद यह मेरे लिए बेहद भावनात्मक क्षण है। साइना ने मिश्रित टीम चैंपियनशिप में सभी मैच खेले और इसके बाद उन्होंने व्यक्तिगत स्पर्धा में हिस्सा लिया।

यह मुकाबला बराबरी का था: साइना
साइना से पूछा गया कि लगातार खेलने के कारण क्या उनके पांवों की स्थिति कैसी है, उन्होंने कहा- वे जवाब दे चुके हैं।’’ इस मैच से पहले साइना का सिंधू के खिलाफ रिकॉर्ड 3-1 था और उन्होंने इस अंतर को और बढ़ा दिया।

उन्होंने अपनी प्रतिद्वंद्वी और साथी के बारे में कहा- यह बराबरी का मुकाबला था यह मेरे लिए वास्तव में कड़ा था क्योंकि मैं पिछले 10-12 दिन से खेल रही थी। वह लंबे कद की है, उसके पांव लंबे हैं और मेरे से बेहतर कोर्ट को कवर करती है। मुझे इधर से उधर दौडऩा पड़ा। साइना ने कहा- मैंने पिछले कुछ महीनों में पांच किग्रा वजन कम किया इससे मुझे कोर्ट कवर करने में मदद मिली। 

पिता के विवादों के कारण साइना के लिए खेलों की शुरूअात अच्छी नही थी 
साइना के लिए खेलों की शुरूआत अच्छी नहीं रही थी। अपने पिता को खेल गांव में प्रवेश नहीं मिलने के कारण उन्होंने खेलों से हटने की धमकी तक दे डाली थी। उनके पिता को मान्यता पत्र मिला लेकिन इसके लिये साइना को आलोचनाएं झेलनी पड़ी। इसके बाद उन्हें चोट से भी जूझना पड़ा लेकिन वह खतरा नहीं बनी। उन्होंने खुलासा किया- टीम स्पर्धा में घुटने के नीचे पांव की चोट उभरकर सामने आयी और मैं तब भी खेलती रही। यह बड़ी समस्या नहीं थी। मुझे इससे उबरने में केवल दो तीन दिन का समय लगा। क्रिस्टी गिलमर के खिलाफ मेरा मैच लंबा ङ्क्षखचा और मुझे लगता है कि वहां समस्या बढ़ गई थी।