नई दिल्ली : टेनिस के महानतम खिलाड़ियों में शामिल नोवाक जोकोविच मानते हैं कि यही आदत बच्चों की कल्पना व स्वतंत्र सोच को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचा रही है। 'ऑन पर्पस' पॉडकास्ट में जोकोविच ने बताया कि जब उनके 10 वर्षीय बेटे ने उनसे कहा कि वह बोर हो रहा है तो उन्होंने स्क्रीन देने के बजाय समझाया कि 'कभी-कभी बोर होना भी जरूरी है।'
जोकोविच के मुताबिक हर खाली पल को मोबाइल से भर देने की आदत बच्चों को अपने विचारों के साथ रहने का अवसर नहीं देती। बोरियत ही वह समय है, जब बच्चे नई कल्पनाएं करते हैं, अपने खेल खुद गढ़ते हैं और समस्याओं का समाधान तलाशना सीखते हैं। यही प्रक्रिया रचनात्मकता और आत्मनिर्भर सोच की नींव रखती है।
भारत के लिए बड़ा सबक
भारत में भी बाल रोग विशेषज्ञ और मनोवैज्ञानिक चेतावनी दे रहे हैं कि जरूरत से ज्यादा स्क्रीन टाइम बच्चों की भाषा, एकाग्रता, नींद, भावनात्मक संतुलन व सामाजिक व्यवहार बिगाड़ सकता है। बचपन में सबसे प्रभावी सीख आमने-सामने की बातचीत। खुले में खेल, प्रकृति और वास्तविक अनुभवों से मिलती है। बच्चा अपने विचारों को व्यवस्थित करता है, कल्पनाशक्ति विकसित करता है और खुद के साथ सहज होना सीखता है। यही गुण आत्मविश्वास, धैर्य व निर्णय लेने की क्षमता मजबूत करते हैं।
मैं भी रील्स के जाल में फंसा : ऑल्टमैन
चैटजीपीटी बनाने वाली ओपनएआइ के प्रमुख सैम ऑल्टमैन ने भी स्वीकार किया कि AI वीडियो टूल सोरा विकसित करते समय उन्होंने यूजर्स का व्यवहार समझने के लिए टिकटॉक डाउनलोड किया था। इरादा रिसर्च का था, लेकिन कुछ मिनट की स्क्रॉलिंग धीरे-धीरे घंटों में बदल गई। यह अनुभव किसी लत जैसा था।