नई दिल्ली: एशियन गेम्स 2026 में भारतीय महिला रिकर्व टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए गोल्ड मेडल अपने नाम किया। इस ऐतिहासिक जीत का हिस्सा हरियाणा की 19 वर्षीय तीरंदाज किर्ती शर्मा भी रहीं। ग्रामीण हरियाणा के रीटौली गांव से निकलकर एशियन गेम्स तक पहुंचने वाली किर्ती का सफर आसान नहीं रहा। उन्हें बचपन से ही खराब सेहत और कई सामाजिक चुनौतियों का सामना करना पड़ा।
दक्षिण कोरिया को हराकर रचा इतिहास
किर्ती शर्मा, अंकिता भगत और कुमकुम मोहोड़ की भारतीय महिला रिकर्व टीम ने फाइनल में मजबूत दक्षिण कोरियाई टीम को 5-3 से हराकर गोल्ड मेडल जीता। यह जीत इसलिए भी खास रही क्योंकि भारतीय टीम ने इस स्पर्धा में एशियन गेम्स में दक्षिण कोरिया के 44 साल से चले आ रहे दबदबे को खत्म किया। फाइनल मुकाबला जापान के ओकाजाकी चुओ सोगो पार्क में खेला गया, जहां भारतीय तिकड़ी ने दबाव के बीच शानदार प्रदर्शन करते हुए खिताब अपने नाम किया।
बचपन से खराब सेहत ने बढ़ाई मुश्किलें
किर्ती ने बताया कि बचपन से ही उनकी तबीयत ठीक नहीं रहती थी। इसकी वजह से उन्हें तीरंदाजी में भी शुरुआत में कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा। भारी पाउंडेज वाले धनुष को उठाना तक उनके लिए आसान नहीं था।
किर्ती ने SAI मीडिया से कहा, 'मैं बचपन से ही खराब सेहत से जूझ रही थी। मुझे कई लोगों की नकारात्मक बातें सुननी पड़ती थीं, जो मेरी क्षमता पर सवाल उठाते थे कि क्या मैं तीरंदाजी में बड़ा मुकाम हासिल कर पाऊंगी। शुरुआत में शारीरिक रूप से फिट नहीं होने के कारण मेरे लिए भारी पाउंडेज वाले धनुष को उठाना भी मुश्किल था। लेकिन मैं अपने आलोचकों को गलत साबित करने के लिए हर संभव कोशिश करने के लिए दृढ़ थी।'
किसान पिता ने बेटी के सपने का दिया साथ
किर्ती के पिता विजय शर्मा किसान हैं। आर्थिक चुनौतियों के बावजूद उन्होंने बेटी के खेल करियर का पूरा साथ दिया और उसकी जरूरतों को पूरा करने की कोशिश की। किर्ती ने कहा, 'मेरे पिता किसान हैं। लेकिन उन्होंने हमेशा मेरा समर्थन किया है और आर्थिक परेशानियों के बावजूद मेरे खेल करियर से जुड़े सभी खर्चों का ध्यान रखा है।'
किर्ती ने यह भी बताया कि कई लोगों ने उनके पिता को बेटी को खेलों में भेजने से रोकने की कोशिश की थी। उन्होंने कहा, 'कई लोगों ने मेरे पिता से कहा कि उन्हें मुझे खेलों में नहीं जाने देना चाहिए क्योंकि मैं एक लड़की हूं। उन्होंने मेरी खराब सेहत की वजह से मेरी सफलता की क्षमता पर भी सवाल उठाए। लेकिन मेरे पिता ने हमेशा मुझ पर विश्वास किया।'
कोच और SAI का भी मिला बड़ा साथ
किर्ती ने अपनी सफलता का श्रेय अपने परिवार के साथ-साथ भारतीय खेल प्राधिकरण यानी SAI और अपने कोच उद्धम सिंह को भी दिया। उन्होंने बताया कि कोच के समर्थन ने उनके करियर को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई। किर्ती ने कहा, 'मेरे परिवार और मेरे कोच ने हमेशा मेरा समर्थन किया और मुझे विश्वास दिलाया कि मैं कुछ बड़ा कर सकती हूं। दरअसल, मैंने SAI हजारीबाग में ट्रायल दिया था क्योंकि मेरे कोच उद्धम सिंह का वहां ट्रांसफर हो गया था। शुरुआती वर्षों में मैं उद्धम सर की शुरू की गई एक अकादमी में ट्रेनिंग करती थी।'
चार साल पहले SAI हजारीबाग पहुंची थीं
किर्ती ने बताया कि वह करीब चार साल पहले SAI हजारीबाग पहुंची थीं। इसके बाद उनके करियर में तेजी से सुधार आया और उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई। उन्होंने कहा, 'मैं चार साल पहले SAI हजारीबाग गई थी। तब से मेरा करियर काफी तेजी से बेहतर हुआ है। मैंने जो भी हासिल किया है, उसके लिए SAI और उद्धम सिंह सर जिम्मेदार हैं।'
किर्ती के सफर ने दिखाया जज्बा
खराब सेहत, आर्थिक चुनौतियों और सामाजिक दबाव के बावजूद किर्ती शर्मा ने तीरंदाजी में अपना सफर जारी रखा। परिवार और कोच के समर्थन के साथ उन्होंने अपनी मेहनत पर भरोसा बनाए रखा और आखिरकार एशियन गेम्स जैसे बड़े मंच पर गोल्ड मेडल जीतकर अपनी कहानी को ऐतिहासिक उपलब्धि में बदल दिया।
भारतीय महिला रिकर्व टीम की ऐतिहासिक जीत
किर्ती शर्मा, अंकिता भगत और कुमकुम मोहोड़ की भारतीय महिला रिकर्व टीम ने दक्षिण कोरिया को 5-3 से हराकर गोल्ड मेडल जीता। इस जीत के साथ भारत ने महिला रिकर्व टीम स्पर्धा में दक्षिण कोरिया के 44 साल के दबदबे को खत्म किया। जापान के ओकाजाकी चुओ सोगो पार्क में मिली यह जीत भारतीय तीरंदाजी के लिए बड़ी उपलब्धि रही।