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नई दिल्लीः भारत के अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट की शुरूआत 1932 में टेस्ट के जरिए हुई थी। उस समय जून के महीने में इंग्लैंड का दौरा किया और पहला टेस्ट मैच खेला था। इस मैच में खेले एक खिलाड़ी का आज ही के दिन यानि की 7 दिसंबर को हुआ था। वह पहले विकेटकीपर भी थे जिन्होंने भारतीय बॉलिंग की पहली पारी में पहले गेंद को विकेट के पीछे रोका। इनका नाम है जर्नादन ग्यानोबा नावले। महाराष्ट्र के फुलगांव में सात दिसंबर 1902 को जन्मे पहले बल्लेबाज जनार्दन नावले को उनके 115वें जन्मदिवस पर याद कर रहे हैं। एक शूगर मिल में बतौर सिक्योरिटी गार्ड काम करते नावले ऐसे पहले बल्लेबाज बने जिन्होंने भारत की तरफ से टेस्ट मैच पर्दापण में पहली गेंद भी खेली।

उन्होंने अपने पहले टेस्ट में दाएं हाथ से बल्लेबाजी करते हुए पहली पारी में 12 तो दूसरी पारी में 13 रन बनाए। नावले ने अपने करियर में कुल 2 टेस्ट मैच ही खेले, जिसमें उन्होंने सिर्फ 42 रन बनाए। हालांकि उन्होंने 65 फस्ट क्लास मैच में 13 की औसत से 1976 रन भी बनाए। इसमें नौ अर्धशतक भी शामिल हैं। विकेट के पीछे उन्होंने 100 कैच पकड़े जबकि 36 स्टंपिंग कीं। क्रिकेट की बाइबल कहे जाने वाली विस्डन ने उन्हें सबसे तेजतरार कीपर में से एक माना था।
Janardan Navle image

197 फस्ट क्लास शतक लगाने वाले जैक होब्स ने गावले को जॉर्ज डकवर्थ (जिनकी बनाई डकवर्थ प्रणाली आज भी क्रिकेट में इस्तेमाल होती है) और बर्ट ओल्डफील्ड की श्रेणी का क्रिकेटर कहा। गावले में 30 साल की उम्र में टेस्ट क्रिकेट में पर्दापण किया था। हालांकि 16 साल की उम्र में ही वह अपना पहला अन-ऑफिशियल मैच खेल चुके थे। उनका निधन 76 साल की उम्र में पुणे में सात सितंबर 1979 को हुआ था।
 

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