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जकार्ताः भारतीय महिला हॉकी टीम का एशियाई खेलों में 36 साल के लंबे अंतराल के बाद स्वर्ण पदक जीतने का सपना शुक्रवार को हाई वोल्टेज फाइनल में जापान के हाथों 1-2 की हार के साथ टूट गया। भारतीय महिला टीम 20 साल के अंतराल के बाद 18वें एशियाई खेलों के फाइनल में खेल रही थी लेकिन उसे रजत पदक से संतोष करना पड़ा। जापान ने स्वर्ण पदक जीतने के साथ-साथ अपनी मेजबानी में 2020 में होने वाले टोक्यो ओलंपिक के लिए सीधे क्वालीफाई भी कर लिया। 
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भारत ने एशियाई खेलों में एकमात्र बार 1982 में नयी दिल्ली में अपनी मेजबानी में स्वर्ण पदक जीता था। भारतीय पुरुष टीम के सेमीफाइनल में मलेशिया के हाथों सडन डैथ में हारने के बाद उम्मीद थी कि महिला टीम स्वर्ण पदक जीतकर इन जख्मों पर मरहम लगाएगी लेकिन महिला टीम भी निराश कर गयी और उसे दूसरी बार रजत पदक से संतोष करना पड़ा। चीन ने इससे पहले कोरिया को 2-1 से हराकर कांस्य पदक जीता। भारतीय महिला टीम ने 1982 में स्वर्ण, 1986 में कांस्य, 1998 में रजत, 2006 में कांस्य और 2014 में कांस्य पदक जीता था। इस बार भारत के हाथ रजत पदक लगा। जापानी खिलाड़ियों ने स्वर्ण पदक जीतने के बाद एक-दूसरे को गले लगाकर इसकी खुशी मनाई जबकि फाइनल हारने से भारतीय खिलाड़ी बेहद मायूस हो गईं। 

भारतीय महिला टीम ने भी लगभग वैसी ही गलतियां कीं जो पुरुष टीम ने सेमीफाइनल में मलेशिया के हाथों पराजय में की थी। जापानी टीम कुछ समय के लिए चौथे क्वार्टर में 10 खिलाड़ियों के साथ खेली लेकिन भारतीय टीम इसका फायदा नहीं उठा सकी। अंतिम छह मिनटों में जब भारतीय खिलाड़ियों को जब जापान के डी में सेंध लगाने की जरुरत थी तब उन्होंने दो-तीन मिनट का समय हॉफ लाइन के पास खाली गेंद पर नियंत्रण बनाने में लगा दिया। मैच के 58वें मिनट में गोलकीपर सविता को बाहर बुलाकर लालरेमसियामी को अंदर उतारा गया लेकिन नतीजा हार ही रहा। आखिरी मिनट में वंदना कटारिया को जापान के गोल के ठीक सामने शानदार पास मिला लेकिन वह इसे गोल में नहीं पहुंचा पायीं। इसके साथ ही भारत की तमाम उम्मीदें समाप्त हो गईं। जापान ने एशियाई खेलों में भारत के साथ 11 मुकाबलों में छठी बार जीत हासिल की। जापान ने भारत को 1990, 2002, 2006 और 2010 में दो बार हराया था। 
 

 

 

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