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चंडीगढ़: भारत को तीन बार ओलंपिक में स्वर्ण पदक दिलाने में अहम भूमिका निभाने वाले दिग्गज हाॅकी खिलाड़ी बलबीर सिंह सीनियर स्थिति में अब सुधार है और की तीन महीने तक अस्पताल में बिताने के बाद उन्हें छुट्टी दी जा सकती है। सांस लेने में तकलीफ के कारण उन्हें दो अक्टूबर को पीजीआईएमईआर में भर्ती कराया गया है। उन्होंने 31 दिसंबर को अस्पताल के प्राइवेट वार्ड में अपना 95वां जन्मदिन मनाया था। अस्पताल के सूत्रों ने शुक्रवार को बताया कि अस्पताल के श्वास आपात चिकित्सा कक्ष (आरआईसीयू) उनका उपचार चला और पिछले कुछ सप्ताह में उनकी स्थिति में सुधार हुआ है। चिकित्सक अगले कुछ दिन उनके स्वास्थ्य की निगरानी करेंगे, जिसमें और अधिक सुधार होने पर उन्हें घर भेजा जा सकता है।
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अस्पताल के बिस्तर से अपने 95वें जन्मदिन के दिन इस महान खिलाड़ी ने फेसबुक पर लिखा था, ‘आज 90 दिन हो गए जब मैं पीजीआई चंडीगढ में आया था। मेरी जिंदगी की हर बात की तरह यह भी शायद पहले से तय था। मैंने अपना 95वां जन्मदिन पीजीआई के बेहतरीन और ख्याल रखने वाले कर्मचारियों के साथ मनाया जो मेरे दूसरे परिवार की तरह बन गए है।’ उन्होंने लिखा, ‘मंजिले भी जिद्दी हैं, रास्ते भी जिद्दी हैं, पर क्या करूं मैं-हौसले भी तो मेरे जिद्दी है।’ उन्होंने प्रशंसकों को नए साल की शुभकामनाएं देते हुए लिखा, ‘आपके शुभकामनाओं और प्रार्थनाओं से जल्द ही घर में मिलता हूं। दुनियाभर के मेरे दोस्तों और परिवार को नये साल की शुभकामनाएं।’

लंदन ओलंपिक 2012 में उन्हें आधुनिक ओलंपिक इतिहास के 16 महान खिलाडिय़ों में चुना गया था और इस सूची में वह अकेले भारतीय थे। ओलंपिक में पुरूष हाॅकी फाइनल में सर्वाधिक गोल का उनका रिकाॅर्ड अभी भी बरकरार है। उन्होंने हेलसिंकी ओलंपिक 1952 में नीदरलैंड के खिलाफ फाइनल में भारत की 6-1 से जीत में पांच गोल किये थे। उन्हें 1957 में पद्मश्री मिला था और वह 1975 विश्व कप विजेता भारतीय टीम के मैनेजर भी थे।

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