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स्पोर्ट्स डेस्क : रेफ्युजी फुटबॉलर ने प्रत्यर्पण मामले में लड़ते हुए अपनी आजादी के लिए सोमवार को अपील की। फुटबाॅलर ने निवेदन करते हुए कहा कि कृपा उसे वापस बहरीन न भेजा जाए जिसके बाद बैंकॉक की अदालत ने फुटबाॅलर की अपील को मान लिया है। बहरीन के रेफ्युजी और आस्ट्रेलिया के रहने वाले हकीम एल-अरेबी को डर है कि अगर उसे वापस भेजा गया तो उसे या तो सजा मिलेगी या फिर उसे मौत के घाट उतार दिया जाएगा।

अरेबी को बहरीन के पुलिस स्टेशन में बर्बरता करने के आरोप में दोषी ठहराया गया था। लेकिन, अरेबी का कहना है कि उस समय वह मैच खेलने देश से बाहर गया हुआ था और उसे इस मामले में फंसाया जा रहा है। प्लेयर का मानना है कि एशियाई फुटबॉल परिसंघ (AFC) प्रेजिडेंट और बहरीन के शासक परिवार के सदस्य शेख सलमान बिन अब्राहिम अल खलीफा की आलोचना करने पर उसे निशाना बनाया जा रहा है।

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बेहरीन की आज्ञा पर अरेबी को नवम्बर में बैंकाॅक एयरपोर्ट पर गिरफ्तार किया गया था। वह थाईलैंड हनीमून पर आया था। अरेबी को तब से हिरासत में रखा गया जब तक थाई अदालत ये तय करती हैं कि उसे वापस भेजा जाए या नहीं। पूर्व आस्ट्रेलियाई फुटबॉल कप्तान क्रेग फोस्टर और अन्य प्रचारक अरेबी का साथ देने कोर्ट पहुंचे थे और उन्हीं की उपस्थिति में अरेबी ने कोर्ट से बेहरीन वापस न भेजे जाने की अपील की। 

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फोस्टर ने कहा कि तुमाही पत्नी ने तुमाहे लिए प्यार भेजा है और आस्ट्रेलिया भी तुमाहरे साथ है। इस पूरे मामले पर अदालत का कहना है कि अरेबी को प्रत्यर्पण अनुरोध पर आपत्ति करने के लिए 60 दिन का समय दिया जाएगा और अप्रैल में जब न्यायाधीशों का पुनर्गठन होगा तब उसे अपना केस सामने रखने की अनुमति होगी। उधर, इस मामले में फुटबाॅलर के वकील Nadthasiri Bergman ने कहा, 'आपत्ति पत्र के साथ उन्हें अदालत को यह सबूत भी देना होगा कि बहरीन के लिए हकीम का प्रत्यर्पण उनके जीवन के लिए खतरा पैदा करेगा। 

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